Gorakhpur: उत्तर प्रदेश में विधान परिषद (MLC) चुनाव की गहमागहमी के बीच भारतीय जनता पार्टी के एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह की एक हाथ से लिखी चिट्ठी ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। फेसबुक पर साझा की गई इस चिट्ठी में उन्होंने अपने अपमान और संघर्ष का जिक्र किया है, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में इसके विभिन्न मायने निकाले जा रहे हैं।
फेसबुक पर साझा की हाथ से लिखी चिट्ठी
उत्तर प्रदेश में एमएलसी चुनाव के मतदान से ठीक पहले बीजेपी के विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक पत्र साझा किया है। इस चिट्ठी में उन्होंने किसी भी प्रत्याशी का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया है और न ही किसी के पक्ष या विरोध में खुलकर बात कही है। हालांकि, उनके बयानों और तेवरों को लेकर राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उन्होंने चुनावी माहौल में एक बड़ा सियासी दांव चल दिया है।
चिट्ठी वायरल होने के बाद इसे 12 अक्टूबर को गोरखपुर में आयोजित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सभा के दौरान कथित तौर पर मंच पर कुर्सी न मिलने और क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय के साथ हुई उनकी बहस से जोड़ा जा रहा है। चर्चा है कि देवेंद्र सिंह इस घटनाक्रम के बाद से पार्टी के भीतर असहज और नाराज चल रहे थे, जो अब इस पत्र के माध्यम से खुलकर सामने आ गया है।
शिक्षकों और प्रतियोगी नौजवानों को बताया परिवार का हिस्सा
चिट्ठी में देवेंद्र प्रताप सिंह ने अपने लंबे संघर्ष और पीड़ा को साझा किया है। उन्होंने शिक्षकों और प्रतियोगी नौजवानों को अपने परिवार का हिस्सा बताते हुए कहा कि न्याय के लिए किए गए उनके संघर्ष को अपमानित किया गया है। उन्होंने लिखा है कि वे हमेशा से अन्याय के खिलाफ पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए खड़े रहे हैं और उनके दरवाजे से आज तक कोई निराश नहीं लौटा।
23 अक्टूबर को सशक्त जनादेश की अपील
देवेंद्र प्रताप सिंह ने अपने पत्र के अंत में लिखा, “शिक्षक और प्रतियोगी नौजवान मेरे परिवार का हिस्सा हैं। न्याय के लिए हमारे संघर्ष को अपमानित किया गया। जिनके मन में न्याय पाने की ललक हो, जिन्हें मेरे संघर्ष में विश्वास हो, जो मेरे प्रति स्नेह, सम्मान और आत्मीय भाव रखते हों, ऐसे सभी शिक्षक साथियों से अन्याय और अपमान के खिलाफ 23 अक्टूबर को सशक्त जनादेश की प्रार्थना करता हूँ।”
देवेंद्र प्रताप सिंह पहले भी कई मौकों पर पार्टी लाइन से हटकर अपने विचार रखते रहे हैं। ऐसे में मतदान से महज कुछ दिन पहले उनका यह पत्र राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
