Lucknow News: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची में गड़बड़ी मिलने पर अब निचले कर्मचारियों के साथ ही मंडलायुक्त और जिला निर्वाचन अधिकारी (डीएम) की भी जवाबदेही तय होगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने पीलीभीत प्रकरण के बाद कंप्यूटर सहायकों द्वारा फॉर्म फीडिंग पर रोक लगाते हुए यह काम बीएलओ को सौंप दिया है।
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। पीलीभीत जिले में मतदाता सूची में सामने आई गंभीर गड़बड़ी के बाद आयोग ने स्पष्ट किया है कि अब किसी भी तरह की लापरवाही पर सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि संबंधित जिले के जिला निर्वाचन अधिकारी (डीएम) और मंडलायुक्त भी जवाबदेही के दायरे में आएंगे।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने मंडलायुक्तों, जिला निर्वाचन अधिकारियों, ईआरओ, एईआरओ और कंप्यूटर सहायकों के साथ वर्चुअल बैठक में निर्देश दिए कि विधान सभा क्षेत्रों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) में किसी भी स्तर पर त्रुटि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-32 का हवाला देते हुए चेताया कि निर्वाचन दायित्वों के उल्लंघन पर दो साल तक के कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
कंप्यूटर सहायकों की फीडिंग बंद, बीएलओ ऐप से होगा डिजिटाइजेशन
आयोग ने व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए कंप्यूटर सहायकों द्वारा मतदाता सूची के फॉर्म की फीडिंग कराने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अब भौतिक (कागजी) रूप से प्राप्त सभी फॉर्म सीधे बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) द्वारा ‘बीएलओ ऐप’ के जरिए डिजिटाइज किए जाएंगे। इसके साथ ही, 10 अप्रैल को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान समाप्त होने के बाद से अब तक कंप्यूटर सहायकों द्वारा ऑनलाइन दर्ज किए गए फॉर्म-6, 7 और 8 की अनिवार्य जांच कराई जाएगी।
मंडलायुक्तों को रोल प्रेक्षक के रूप में अपने मंडल के सभी जिलों में मतदाता सूची के कार्यों की सघन निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि बीएलओ को प्राप्त सभी मूल भौतिक फॉर्म सुरक्षित रखे जाएं ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनका सत्यापन किया जा सके।
चार जिलों से जवाब तलब, कॉल पेंडेंसी पर सख्ती
मतदाता सूची में दोहरे (डुप्लीकेट) नामों को लेकर इंटरनेट मीडिया पर आई शिकायतों पर समय से आख्या न देने पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बुलंदशहर, सीतापुर, गाजियाबाद और अलीगढ़ के जिला निर्वाचन अधिकारियों के प्रति नाराजगी जताते हुए शीघ्र रिपोर्ट तलब की है। उन्होंने निर्देश दिया कि एसएसआर की ड्राफ्ट सूची में किसी भी मतदाता का नाम दो स्थानों पर दर्ज न रहे।
इसके अलावा एनजीएसपी, पीजीआरएस और इंटरनेट मीडिया से मिली शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण करने के आदेश दिए गए हैं। ‘ईसीआईनेट’ ऐप और मतदाता सेवा पोर्टल पर उपलब्ध ‘बुक ए कॉल विद बीएलओ’ सुविधा के तहत आने वाली किसी भी कॉल रिक्वेस्ट को 48 घंटे के भीतर अटेंड करना अनिवार्य होगा।
ईआरओनेट लॉगिन शेयरिंग पर रोक और पासवर्ड बदलने के निर्देश
डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे ‘ईआरओनेट’ की लॉगिन आईडी और पासवर्ड किसी अन्य से साझा न करें तथा पासवर्ड तत्काल बदलें। वहीं, बीएसएनएल नेटवर्क बाधित होने की स्थिति में काम प्रभावित न हो, इसके लिए अधिकारियों को सीयूजी नंबर के साथ-साथ अपना निजी मोबाइल नंबर भी पोर्टल पर अपडेट करने को कहा गया है।