किशाऊ डैम प्रोजेक्ट से छह राज्यों को मिलेगा भरपूर पानी और बिजली, केंद्र सरकार उठाएगी 90 फीसदी खर्च

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Dehradun News: उत्तर भारत के छह प्रमुख राज्यों दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान के करोड़ों नागरिकों को अब किशाऊ डैम प्रोजेक्ट से भारी फायदा होगा। यह विशाल प्रोजेक्ट इन राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल बंटवारे के विवाद को सुलझाने में काफी मददगार साबित होने वाला है।

यह प्रोजेक्ट यमुना नदी में साल भर पानी का बहाव बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। करीब आठ सालों से अटका पड़ा यह प्रोजेक्ट 15000 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जाएगा। प्रोजेक्ट की मंजूरी मिलने से इन राज्यों की एक बड़ी आबादी को स्वच्छ पेयजल और खेती के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा।

सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस परियोजना पर सहमति जताई है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और जल संसाधन मंत्री सीआर पाटिल के प्रयासों से इसका काम शुरू हो पा रहा है। इस डैम से 97000 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी, जिससे किसानों को पानी की समस्या से राहत मिलेगी।

यह बहुउद्देशीय डैम उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमा पर टोंस नदी पर बनेगा, जो यमुना की प्रमुख सहायक नदी है। इस पर 236 मीटर ऊंचा बांध निर्मित होगा, जो टिहरी बांध के बाद पूरे एशिया का दूसरा सबसे ऊंचा बांध माना जाएगा।

किशाऊ डैम से हर साल 1379 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन भी होगा, जिसे उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश बराबर हिस्सा बांटकर इस्तेमाल करेंगे। इसमें 1324 मिलियन घन मीटर पानी जमा होगा। हिमाचल की वित्तीय दिक्कतों के बाद केंद्र सरकार ने 90 फीसदी खर्च उठाने का नया फॉर्मूला तय किया है।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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