National News: मेडिकल रिसर्च और बायोमेडिकल साइंस के क्षेत्र में भारत ने वैश्विक स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के आधार पर चीनी दूतावास द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में दर्ज क्लिनिकल ट्रायल के मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर रहा है। भारत में कुल 21,410 ट्रायल दर्ज किए गए, जो अमेरिका की तुलना में लगभग 2.4 गुना अधिक हैं।
वैश्विक स्तर पर बायोमेडिकल अनुसंधान और मेडिकल रिसर्च के क्षेत्र में भारत की स्थिति तेजी से मजबूत हुई है। भारत में स्थित चीनी दूतावास द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए गए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में क्लिनिकल ट्रायल रजिस्ट्रेशन के मामले में चीन और भारत दुनिया में सबसे आगे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी इस रैंकिंग में भारत ने अमेरिका, जापान और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों को काफी पीछे छोड़ते हुए दूसरा स्थान प्राप्त किया है।
शीर्ष 10 देशों में भारत-चीन का दबदबा, अमेरिका तीसरे पायदान पर
डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में चीन 24,524 क्लिनिकल ट्रायल के साथ वैश्विक स्तर पर पहले पायदान पर रहा, जबकि भारत 21,410 ट्रायल के साथ दूसरे स्थान पर दर्ज किया गया। दोनों पड़ोसी देशों के बीच केवल 3,114 ट्रायल का अंतर रहा। वहीं, इस सूची में अमेरिका 8,851 ट्रायल के साथ तीसरे स्थान पर रहा, जिसकी तुलना में भारत में करीब 2.4 गुना अधिक क्लिनिकल ट्रायल दर्ज हुए।
वैश्विक सूची में ईरान 4,237 ट्रायल के साथ चौथे, जापान 3,656 ट्रायल के साथ पांचवें और जर्मनी 3,455 ट्रायल के साथ छठे स्थान पर रहा। इसके बाद तुर्किये (2,923), फ्रांस (2,560) तथा स्पेन और ब्रिटेन (प्रत्येक 2,170) का स्थान रहा। शीर्ष 10 देशों में अकेले भारत और चीन की कुल हिस्सेदारी 45,934 क्लिनिकल ट्रायल की रही।
चिकित्सा अनुसंधान में क्लिनिकल ट्रायल की भूमिका
क्लिनिकल ट्रायल किसी भी नई दवा, वैक्सीन, थेरेपी या चिकित्सा उपकरण की प्रभावशीलता और सुरक्षा को मानव शरीर पर वैज्ञानिक रूप से परखने की अनिवार्य प्रक्रिया है। बाजार में किसी दवा को उतारने से पहले कैंसर, डायबिटीज, हृदय रोग और विभिन्न संक्रामक बीमारियों के इलाज में इसके लाभ व संभावित दुष्प्रभावों का सटीक आकलन क्लिनिकल ट्रायल के माध्यम से ही किया जाता है। किसी देश में क्लिनिकल ट्रायल की उच्च संख्या वहां के मेडिकल रिसर्च इकोसिस्टम, अनुसंधान संस्थानों, वैज्ञानिकों और फार्मास्युटिकल कंपनियों की सक्रियता का मुख्य पैमाना मानी जाती है।
मजबूत घरेलू नेटवर्क से बायोमेडिकल हब बना भारत
दवा और वैक्सीन उत्पादन में दुनिया भर में अग्रणी भूमिका निभाने के बाद अब भारत क्लिनिकल रिसर्च में भी एक वैश्विक केंद्र बनकर उभरा है। देश में मेडिकल कॉलेजों, अत्याधुनिक सरकारी व निजी अस्पतालों, प्रतिष्ठित शोध संस्थानों और फार्मास्युटिकल कंपनियों का विस्तृत नेटवर्क मौजूद है। इसके साथ ही, विविध जीवनशैली और आनुवंशिक विविधता वाली विशाल आबादी गंभीर बीमारियों के नए उपचारों और किफायती दवाओं के विकास के लिए एक सशक्त वैज्ञानिक आधार उपलब्ध कराती है, जिससे देश में अनुसंधान गतिविधियों को नई गति मिल रही है।