Lifestyle Desk: सोशल मीडिया पर करीब 20 साल पुराने डिब्बे में घी सुरक्षित मिलने का एक वीडियो तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है। दावा किया जा रहा है कि वर्ष 2006 में रखे गए इस डिब्बे को जब खोला गया, तो अंदर घी ठोस रूप में सुरक्षित नजर आया। इस दावे के सामने आने के बाद जहां नेटिजन्स के बीच इसे लेकर बहस छिड़ गई है, वहीं खाद्य विज्ञान और आयुर्वेद के नजरिए से भी इसके विभिन्न पहलुओं पर विचार किया जा रहा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए गए इस वीडियो के अनुसार, एक व्यक्ति जब करीब दो दशक बाद अपने पैतृक घर लौटा, तो उसे अपने दिवंगत दादाजी का रखा हुआ घी का एक पुराना डिब्बा मिला। डिब्बा खोलने पर उसमें जमा हुआ ठोस पदार्थ देखकर लोग हैरान रह गए कि कोई खाद्य सामग्री इतने लंबे समय तक बिना खराब हुए कैसे रह सकती है।
नमी की कमी और बनाने की वैज्ञानिक प्रक्रिया
खाद्य विज्ञान के अनुसार, पारंपरिक रूप से जब मक्खन को धीमी आंच पर पकाया जाता है, तो उसमें मौजूद पानी पूरी तरह भाप बनकर उड़ जाता है और दूध के ठोस कण (मिल्क सॉलिड्स) अलग हो जाते हैं।
- बैक्टीरिया से बचाव: किसी भी सूक्ष्मजीव या फंगस के पनपने के लिए नमी और अनुकूल वातावरण की आवश्यकता होती है। शुद्ध घी में पानी की मात्रा न के बराबर होने के कारण बैक्टीरिया का प्रसार रुक जाता है।
- एयरटाइट स्टोरेज: यदि शुद्ध घी को पूरी तरह साफ, सूखे और वायुरोधी (एयरटाइट) कंटेनर में रखा जाए, तो यह सामान्य वातावरण में कई वर्षों तक ठोस रह सकता है।
- ऑक्सीकरण का जोखिम: हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि हवा, धूप और तापमान के संपर्क में आने से घी में ऑक्सीडेशन (खराबी) हो सकता है, जिससे उसकी गंध और स्वाद बदल जाते हैं। इसलिए पुराना दिखने वाला घी केवल ठोस दिखने भर से खाने योग्य नहीं माना जा सकता।
आयुर्वेद में ‘पुराण घृत’ का विशेष उल्लेख
भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद में पुराने घी का उल्लेख मिलता है, जिसे ‘पुराण घृत’ कहा जाता है।
- आयुर्वेदिक संहिताओं में 10 वर्ष से अधिक पुराने घी को ‘कुम्भसर्पि’ नाम से भी जाना जाता है।
- पारंपरिक औषधियों के निर्माण में इसका उपयोग त्वचा के पुराने विकारों, घावों को भरने और कतिपय न्यूरोलॉजिकल विकारों के प्रबंधन में बाह्य या आंतरिक रूप से किए जाने का विवरण है।
- हालांकि, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान केवल पुराने घी को गंभीर बीमारियों का पुख्ता उपचार नहीं मानता और इसके चिकित्सकीय उपयोग से पहले विशेषज्ञ परामर्श आवश्यक है।
सोशल मीडिया पर ‘टुलुम चीज’ होने का भी दावा
वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां कुछ लोग शुद्ध देसी घी और मिस्र के पिरामिडों में मिले प्राचीन खाद्य पदार्थों का उदाहरण दे रहे हैं, वहीं कई यूजर्स ने इसे घी मानने से ही इनकार कर दिया है। कुछ यूजर्स का दावा है कि यह तुर्की का पारंपरिक ‘टुलुम चीज’ (Tulum Cheese) हो सकता है, जिसे संरक्षित करके इसी रूप में रखा जाता है। वहीं कुछ लोगों ने डिब्बे की बनावट और सामग्री के रंग-रूप को लेकर वीडियो की प्रामाणिकता पर भी सवाल खड़े किए हैं।