New Delhi News: भारत निर्वाचन आयोग ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए उपयोग होने वाले ऑनलाइन फॉर्म 6 से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ा घोषणा पत्र अलग कर दिया है। चुनाव आयुक्तों द्वारा इसे अनधिकृत बताए जाने के बाद आयोग ने 21 अक्टूबर को यह निर्णय लिया, जिसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे में भी दी गई है।
भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से संबंधित ऑनलाइन मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में बड़ा फेरबदल किया है। नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए निर्धारित ऑनलाइन फॉर्म 6 से एसआईआर से जुड़े घोषणा कॉलम को अब पूरी तरह अलग कर दिया गया है। आयोग के दो चुनाव आयुक्तों द्वारा इस व्यवस्था पर कानूनी सवाल उठाए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है। अब नए आवेदकों को कागजी आवेदन की तरह ही फॉर्म 6 और एसआईआर घोषणा पत्र अलग-अलग प्रारूप में भरने होंगे।
चुनाव आयुक्तों ने उठाए थे कानूनी सवाल
इस घोषणा पत्र को लेकर आयोग के भीतर से ही गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने 16 मई को इस बदलाव पर असहमति जताते हुए कहा था कि फॉर्म 6 का प्रारूप ‘मतदाता पंजीकरण नियम, 1960’ के तहत विधिवत तय किया गया है। इसमें किसी भी तरह का संशोधन करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है और आयोग स्वयं कोई नई शर्त इसमें शामिल नहीं कर सकता।
इसके बाद 13 अगस्त को चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने अपनी आधिकारिक टिप्पणी में इस अतिरिक्त कॉलम को अनधिकृत और गैरकानूनी बताते हुए तत्काल हटाने की मांग की थी। आंतरिक आपत्तियों के बावजूद अगस्त तक यह कॉलम ऑनलाइन फॉर्म पर मौजूद रहा, जिससे विवाद और गहरा गया था।
क्या था फॉर्म 6 में शामिल विवादित कॉलम?
फॉर्म 6 का उपयोग नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए किया जाता है। ऑनलाइन आवेदन के दौरान फॉर्म में एसआईआर से जुड़ी एक अनिवार्य घोषणा जोड़ी गई थी, जिसमें आवेदक को दिए गए तीन विकल्पों में से किसी एक को चुनना होता था। इस घोषणा का उत्तर दिए बिना आवेदन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती थी। विवाद का मुख्य आधार यही था कि बिना विधिसम्मत विधायी संशोधन के निर्धारित फॉर्म में नई अनिवार्य शर्त जोड़ना नियमों का उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट में आयोग का स्पष्टीकरण
आयोग के इलेक्टोरल रोल डिवीजन ने 21 अक्टूबर 2026 को इस घोषणा पत्र को फॉर्म 6 से अलग करने का फैसला लिया। इसके बाद 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में आयोग ने स्पष्ट किया कि फॉर्म 6 में कोई औपचारिक कानूनी संशोधन नहीं किया गया था।
आयोग के अनुसार, एसआईआर घोषणा को ऑनलाइन फॉर्म 6 के साथ केवल इसलिए समाहित किया गया था ताकि आवेदक एक ही ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) और डिजिटल हस्ताक्षर के जरिए आसानी से आवेदन पूरा कर सकें। हालांकि, आयोग ने यह स्वीकार किया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इसे प्रस्तुत करने के तरीके से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मूल फॉर्म में संशोधन कर दिया गया है। प्रक्रिया को नियमसम्मत और पारदर्शी बनाए रखने के लिए अब दोनों दस्तावेजों को अलग-अलग भरने की व्यवस्था बहाल की गई है।