New Delhi News: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान में इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर या एआई टूल का नाम और वर्जन बताने से इनकार कर दिया है। एक आरटीआई के जवाब में आयोग ने इसे ट्रेड सीक्रेट और बौद्धिक संपदा बताते हुए सूचना देने से छूट का हवाला दिया है। देश भर में 13 करोड़ से अधिक वोटरों के नाम हटाए जाने को लेकर पहले से ही यह प्रक्रिया विवादों में है।
देशभर में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के तहत 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने को लेकर विवाद गहरा गया है। इस बीच भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत उस सॉफ्टवेयर, ऐप या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल का नाम और वर्जन सार्वजनिक करने से साफ इनकार कर दिया है, जिसकी मदद से मतदाता सूची में गड़बड़ियों की पहचान की गई थी।
ट्रेड सीक्रेट और तीसरे पक्ष के नुकसान का दिया हवाला
यह आरटीआई आवेदन तेलंगाना के करीमनगर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एम. ए. मुजीब अय्यूब द्वारा दाखिल किया गया था। इस पर 16 अक्टूबर 2026 को दिए अपने आधिकारिक जवाब में चुनाव आयोग ने आरटीआई कानून, 2005 की धारा 8(1)(d) का हवाला दिया। आयोग का कहना है कि यह जानकारी वाणिज्यिक गोपनीयता (कमर्शियल कॉन्फिडेंस), ट्रेड सीक्रेट और बौद्धिक संपदा (IP) से जुड़ी है। इसे सार्वजनिक करने से तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) की प्रतिस्पर्धी स्थिति को नुकसान पहुंच सकता है।
इसके अलावा, नाम हटाने की प्रक्रिया की समीक्षा करने वाले अधिकारियों से जुड़े सवाल पर आयोग ने आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(g) का उल्लेख किया। यह प्रावधान ऐसी किसी भी जानकारी को रोकने की छूट देता है, जिससे किसी व्यक्ति के जीवन या शारीरिक सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
ERO ही नाम जोड़ने या हटाने का वैधानिक अधिकारी: आयोग
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया के लिए कोई अलग से नया सॉफ्टवेयर नहीं खरीदा गया है। आयोग के अनुसार, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13B के तहत संबंधित विधानसभा क्षेत्र का निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) ही तथ्यों और आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का एकमात्र वैधानिक अधिकारी है।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने दी प्रथम अपील दाखिल करने की सलाह
चुनाव आयोग के इस जवाब पर भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ओ. पी. रावत ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “यह एक कानूनी मामला है और आवेदक को सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष प्रथम अपील दाखिल करनी चाहिए। चुनाव आयोग जिन सवालों के जवाब देने से बच रहा है, अपील के जरिए उनके जवाब मांगे जाने चाहिए।”
13 करोड़ वोटरों के नाम कटने और आंतरिक मतभेद पर विवाद
एसआईआर प्रक्रिया के तहत देश भर में 13 करोड़ से अधिक वोटरों के नाम हटाए जाने को लेकर नागरिक संगठन और विपक्षी राजनीतिक दल लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं। इससे पहले सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त एस. एस. संधू और विवेक जोशी ने नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त के कई फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित असहमति दर्ज कराई थी और इस संबंध में कैबिनेट सचिव को पत्र भी लिखा था।
इसके साथ ही, पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में रिवीजन प्रक्रिया के दौरान आई तकनीकी समस्याओं के चलते चुनाव आयोग के ‘इरोनेट’ (ERONET) पोर्टल की कार्यप्रणाली पर भी आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। हालांकि आयोग का कहना रहा है कि आंतरिक विचार-विमर्श में मतभेद सामान्य प्रक्रिया है और सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं। इसके बावजूद सॉफ्टवेयर की जानकारी साझा न करने के फैसले से प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर बहस फिर तेज हो गई है।