क्या अंडा खाने से बच्चियों में जल्दी शुरू हो जाते हैं पीरियड्स? डॉक्टर से जानें इस दावे का पूरा सच

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Delhi News: अंडा प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्वों का एक बेहतरीन स्रोत माना जाता है, लेकिन इसके सेवन को लेकर लोगों में कई तरह के भ्रम फैले हुए हैं। विशेष रूप से बढ़ती उम्र की बच्चियों को रोजाना अंडा खिलाने पर उनमें जल्दी पीरियड्स आने का डर जताया जाता है।

अक्सर माना जाता है कि अंडे की तासीर गर्म होती है और इसमें मौजूद फैट या कोलेस्ट्रॉल बच्चियों में समय से पहले प्यूबर्टी को ट्रिगर कर देता है। हालांकि, प्रसिद्ध डॉक्टर शुभम वत्स्य ने इस बात को पूरी तरह से एक मिथक और अफवाह बताया है।

जानिए क्या कहती है मेडिकल साइंस और अंडों का सच

डॉक्टर्स के अनुसार, अंडों में प्रोटीन, मिनरल्स और सभी 9 जरूरी अमीनो एसिड्स पाए जाते हैं। अंडों में ऐसे कोई हार्मोन्स नहीं होते जो बच्चियों में प्यूबर्टी को किसी भी तरह से ट्रिगर कर सकें। जब शरीर में अंडा पचता है, तो इसके प्रोटीन्स डाइजेस्टिव एंजाइम्स द्वारा ब्रेकडाउन हो जाते हैं।

इसलिए अंडा खाने से शरीर में कोई बाहरी हार्मोन ट्रांसफर नहीं होता है। किसी भी प्रामाणिक रिसर्च में यह बात साबित नहीं हुई है कि अंडा खाने से अर्ली प्यूबर्टी आती है। प्यूबर्टी पूरी तरह से जेनेटिक्स, ओवरऑल न्यूट्रिशन और फिजिकल एक्टिविटी पर निर्भर करती है।

कम उम्र में पीरियड्स आने के पीछे ये हैं असली कारण

बच्चियों में समय से पहले पीरियड्स शुरू होने का मुख्य कारण उनकी लाइफस्टाइल, अस्वस्थ खान-पान और हार्मोनल असंतुलन है। शरीर में जरूरत से ज्यादा बढ़ता फैट समय से पहले एस्ट्रोजन हार्मोन का प्रोडक्शन बढ़ा देता है, जिससे रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स तेजी से डेवलप होने लगते हैं।

इसके अलावा जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड, चॉकलेट और शुगरी ड्रिंक्स का ज्यादा सेवन करने से बच्चियों में मोटापा और इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या बढ़ती है। यह हार्मोनल असंतुलन प्यूबर्टी की प्रक्रिया को समय से पहले शुरू करने में बड़ी भूमिका निभाता है।

खराब लाइफस्टाइल और स्क्रीन टाइम भी हैं जिम्मेदार

शारीरिक गतिविधियों की कमी, अत्यधिक स्क्रीन टाइम और मानसिक तनाव बच्चियों की नींद को काफी प्रभावित करते हैं। नींद पूरी न होने के कारण शरीर का नेचुरल हार्मोनल बैलेंस बिगड़ जाता है, जिससे अर्ली प्यूबर्टी का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है।

अतः अंडों से डरने के बजाय बच्चियों की ओवरऑल लाइफस्टाइल को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए। उन्हें रोजाना संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और फिजिकल एक्टिविटीज में व्यस्त रखकर इस समस्या से आसानी से बचाया जा सकता है।

Desh Raj
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