दीपावली 2026 पर लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ मुहूर्त और विधि, जानें स्थिर लग्न का समय

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New Delhi News: कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर 8 नवंबर 2026 को दीपावली का पावन पर्व मनाया जाएगा। इस वर्ष गृहस्थों के लिए लक्ष्मी-गणेश पूजन का सबसे शुभ मुहूर्त प्रदोष काल और स्थिर लग्न (वृषभ लग्न) के संयोग में शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार स्थिर लग्न में की गई पूजा से घर में सुख-समृद्धि का स्थायी वास होता है।

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को पूरे देश में दीपावली का त्योहार पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे से प्रारंभ होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक प्रभावी रहेगी। चूंकि 8 नवंबर को प्रदोष काल के दौरान अमावस्या तिथि का संयोग बन रहा है, इसलिए इसी दिन मुख्य दीपावली और लक्ष्मी-गणेश पूजन का विधान संपन्न होगा।

धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्री राम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर और लंका विजय के उपरांत माता सीता व लक्ष्मण सहित अयोध्या लौटे थे। इस अवसर पर अयोध्यावासियों ने दीप प्रज्वलित कर उनका स्वागत किया था, जिसके बाद से प्रतिवर्ष कार्तिक अमावस्या को दीप जलाने की परंपरा चली आ रही है।

लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त और स्थिर लग्न का महत्व

दीपावली पूजन में प्रदोष काल और स्थिर लग्न का विशेष महत्व माना गया है। शास्त्रों के अनुसार स्थिर लग्न में पूजा करने से मां लक्ष्मी का घर में स्थायी निवास बना रहता है:

  • गृहस्थ परिवारों के लिए (प्रदोष काल एवं वृषभ लग्न): शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक। सूर्यास्त के बाद के लगभग 2 घंटे 24 मिनट का समय प्रदोष काल कहलाता है, जो गृहस्थों के लिए पूजन का सर्वोत्तम समय माना जाता है।
  • व्यापारियों एवं संस्थानों के लिए (बही-खाता/चोपड़ा पूजन – कुंभ लग्न): दोपहर 1:27 बजे से दोपहर 2:54 बजे तक।
  • साधकों एवं तांत्रिक अनुष्ठान के लिए (महानिशीथ काल व सिंह लग्न): निशीथ काल रात 11:38 बजे से 9 नवंबर की सुबह 12:31 बजे तक रहेगा, जबकि सिंह लग्न मध्यरात्रि 12:25 बजे से रात 2:42 बजे तक प्रभावी रहेगा।

लक्ष्मी-गणेश पूजन की शास्त्रीय विधि

पूजन प्रारंभ करने से पूर्व सुबह घर और पूजा स्थल की विधिवत साफ-सफाई करें। शाम के समय पूजा स्थल पर उत्तर या पूर्व दिशा में एक लकड़ी की चौकी स्थापित कर उस पर लाल अथवा पीला रेशमी वस्त्र बिछाएं।

चौकी पर भगवान श्री गणेश को माता लक्ष्मी के बाईं ओर स्थापित करें, ताकि मां लक्ष्मी सदैव गणेश जी के दाहिने भाग में रहें। चौकी पर अक्षत की ढेरी बनाकर तांबे या पीतल का कलश जल भरकर स्थापित करें और उस पर आम के पत्ते व नारियल रखें।

हाथ में जल, पुष्प और अक्षत लेकर संकल्प लें। इसके बाद प्रथम पूज्य भगवान गणेश को तिलक, दुर्वा, मोदक और पुष्प अर्पित कर पूजन करें। तत्पश्चात माता लक्ष्मी को रोली, अक्षत, कमलगट्टा, लाल गुलाब, सिंदूर, फल, मिठाई और खीर-बताशे अर्पित करें। सरसों के तेल अथवा गाय के घी का चौमुखी दीपक प्रज्वलित कर स्थापित करें। अंत में गणेश जी और माता लक्ष्मी की आरती कर भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें।

पंच दिवसीय दिवाली उत्सव का कैलेंडर

दीपावली का त्योहार पांच दिनों तक श्रद्धा और उत्साह से मनाया जाता है। वर्ष 2026 में इस महापर्व की शुरुआत 6 नवंबर को धनतेरस के साथ होगी। इसके बाद 7 नवंबर को छोटी दिवाली (नरक चतुर्दशी), 8 नवंबर को मुख्य दीपावली व लक्ष्मी पूजन, 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा और 11 नवंबर 2026 को भाई दूज का पर्व मनाया जाएगा।

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