New Delhi News: भारतीय डाक विभाग अब तकनीक के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। इंडिया पोस्ट ने हिमाचल प्रदेश और असम के कठिन इलाकों में ड्रोन के जरिए पार्सल, चिट्ठियां और जरूरी दस्तावेज भेजने की शुरुआत की है। इसका मुख्य उद्देश्य दुर्गम पहाड़ी व बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में डिलीवरी को बेहद तेज बनाना है।
हिमाचल प्रदेश के मंडी हेड पोस्ट ऑफिस से रेहराधार ब्रांच पोस्ट ऑफिस के बीच करीब 12 किलोमीटर की दूरी है। पहाड़ी रास्तों के कारण सड़क मार्ग से यह दूरी तय करने में दो घंटे से अधिक समय लगता है। ड्रोन के जरिए अब इस डाक सामग्री को केवल सात मिनट में सफलतापूर्वक पहुंचाया जा सकता है।
पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और भूस्खलन के समय सड़क यातायात अक्सर बाधित हो जाता है। ऐसे हालात में हवाई मार्ग से डाक पहुंचाना बेहद मददगार साबित होगा। इससे न केवल समय की भारी बचत होगी, बल्कि दूर-दराज के गांवों में डाक सेवाओं की कार्यक्षमता और रफ्तार में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
असम के नदी तटीय और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भी ड्रोन डिलीवरी बेहद उपयोगी साबित होगी। बारिश के मौसम में पुल या सड़कें टूटने से पार्सल पहुंचने में देरी होती है। ऐसे समय में ड्रोन हवाई रास्ते से बैकअप परिवहन की सुविधा देंगे। इससे आवश्यक डाक सामग्री तय समय पर पहुंच सकेगी।
ड्रोन सेवा का लक्ष्य पारंपरिक डाक व्यवस्था को हटाना नहीं, बल्कि उसे मजबूती देना है। डाकिए और स्थानीय पोस्ट ऑफिस अपना काम पहले की तरह ही करते रहेंगे। ड्रोन केवल उन कठिन और लंबे मार्गों पर डाक बैग पहुंचाने का काम करेंगे, जहां जमीनी सफर में बहुत ज्यादा समय और मेहनत लगती है।
दशकों से ‘डाक बाबू’ पैदल, साइकिल और गाड़ियों से चिट्ठियां पहुंचाते रहे हैं। अब वही सेवा ड्रोन तकनीक के जरिए आधुनिक रूप ले रही है। ब्रांच पोस्ट ऑफिस तक डाक बैग जल्दी पहुंचने से स्थानीय डिलीवरी भी समय से पहले शुरू होगी। इससे ग्राहकों को अपने पार्सल और जरूरी दस्तावेज काफी तेजी से मिलेंगे।
ड्रोन संचालन के सामने सुरक्षा, मौसम, बैटरी क्षमता, पेलोड और खर्च जैसी कई बड़ी चुनौतियां भी हैं। खासकर पहाड़ों में तेज हवा, बारिश और कम दृश्यता के समय उड़ान भरना मुश्किल होता है। इसलिए सुरक्षा नियमों और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही नियमित उड़ानों का संचालन तय किया जाएगा।
फिलहाल यह प्रोजेक्ट हिमाचल और असम के चुनिंदा मार्गों पर ट्रायल के तौर पर चल रहा है। इन प्रयोगों से मिले नतीजों और सुरक्षा समीक्षा के आधार पर भविष्य में इसे देश के अन्य दुर्गम इलाकों में भी लागू किया जाएगा। यह पहल भारतीय डाक के आधुनिकीकरण की दिशा में अहम कदम है।