Mandi News: सर्दियों की आहट के साथ ही पहाड़ों में तापमान गिरने लगा है। ठंड बढ़ने के कारण भोजन की तलाश में जंगली जानवर निचले इलाकों की ओर आ रहे हैं। इस दौरान बेजुबानों की सुरक्षा के लिए वन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। शिकारियों पर नकेल कसने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है।
वन मंडलाधिकारी नाचन मुनीश रांगड़ा ने साफ चेतावनी दी है कि वन्यजीवों का शिकार करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत सामान्य उल्लंघन पर 3 साल तक की जेल या 1 लाख रुपये जुर्माना हो सकता है। संरक्षित क्षेत्र में शिकार पर 7 साल की जेल और 25 हजार रुपये जुर्माना लगेगा।
अधिकारियों के मुताबिक शिकार का मतलब सिर्फ जानवर को मारना नहीं है। फंदा लगाना, जाल में पकड़ना, पीछा करना, घायल करना, जहर देना या पक्षियों के अंडे और घोंसले नष्ट करना भी अपराध है। अधिनियम के अनुसार वन्यजीव, उसका मांस, खाल और सींग सरकारी संपत्ति हैं। इन्हें बेचना या पास रखना गैरकानूनी है।
इन दिनों घोरल, काकड़, जंगली सुअर के साथ मोनाल, कोकलास, कलीज और जुजुराना जैसे पक्षी ग्रामीण इलाकों के पास पहुंच रहे हैं। संभावित शिकार की घटनाओं को रोकने के लिए वन मंडल नाचन ने सभी परिक्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी है। संवेदनशील इलाकों में फील्ड स्टाफ को लगातार नजर रखने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
विभाग ने आम नागरिकों, महिला मंडलों, युवक मंडलों और वन सुरक्षा समितियों से सहयोग की अपील की है। शिकार या किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर तुरंत वन विभाग से संपर्क करें। नागरिक फोन नंबर 01907-250267 पर कॉल करके जानकारी दे सकते हैं। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
यदि कोई वन्यजीव घायल अवस्था में मिले या रिहायशी इलाके में आ जाए, तो लोग खुद कोई कदम न उठाएं। उसे नुकसान पहुंचाने की जगह फौरन विभाग को सूचित करें। विभागीय टीम तुरंत मौके पर पहुंचकर घायल जानवर का प्राथमिक उपचार करेगी और सुरक्षित रेस्क्यू की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित करेगी।