Mandi News: डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, थुनाग (गोहर) द्वारा ‘हिमाचल प्रदेश में आपदा जोखिम प्रबंधन के लिए हिमालयी समुदायों का सशक्तिकरण’ परियोजना के तहत सराज विकास खंड की तीन पंचायतों—शरण, पखरैर और थुनाग में तीन दिवसीय जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों में स्थानीय लोगों को आपदाओं से निपटने के लिए प्रशिक्षित किया गया।
आपदा से पहले, दौरान और बाद के सुरक्षा उपायों पर जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापक (पर्यावरण विज्ञान) एवं परियोजना की मुख्य अन्वेषक डॉ. कशिश वालिया ने प्रतिभागियों को ‘आपदा जोखिम प्रबंधन के लिए सुदृढ़ एवं आपदा-प्रतिरोधी समुदायों का निर्माण’ विषय पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हिमालयी क्षेत्र भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों के कारण प्राकृतिक आपदाओं के प्रति बेहद संवेदनशील है, इसलिए स्थानीय समुदायों को जागरूक और आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है।
डॉ. वालिया ने आपदा से पहले जोखिमों की पहचान करने, निकासी मार्गों की जानकारी रखने और आपातकालीन किट तैयार करने के महत्व को समझाया। इसके साथ ही, आपदा के दौरान संयम बनाए रखने, प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने तथा आपदा के बाद घायलों को प्राथमिक उपचार देने व राहत कार्यों में सहयोग करने के आवश्यक उपायों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी एजेंसियों की नहीं, बल्कि हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
ग्रामीणों ने साझा किए अनुभव और लिया हिस्सा
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय प्रतिभागियों ने वर्ष 2025 में आई प्राकृतिक आपदा के अपने अनुभवों को साझा किया और उस कठिन समय की चुनौतियों व राहत कार्यों पर चर्चा की। इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण अभियान में तीनों पंचायतों से कुल 75 लोगों ने हिस्सा लिया, जिसमें प्रत्येक पंचायत से 25 प्रतिभागी शामिल रहे। ग्रामीणों ने इस पहल में गहरी रुचि दिखाते हुए अपने गांवों में सामूहिक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।