नौकरीपेशा पत्नी की भरण-पोषण अर्जी अदालत ने खारिज की, कहा- आर्थिक रूप से सक्षम महिला हकदार नहीं

Share

- Advertisement -

Mandi News: हिमाचल प्रदेश के सुंदरनगर में फैमिली कोर्ट के अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने नौकरीपेशा पत्नी की अंतरिम भरण-पोषण और कानूनी खर्च की अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने साफ किया कि पर्याप्त आय कमाने वाली महिला पति से भत्ता पाने की हकदार नहीं है।

पत्नी ने मांगी थी भरण-पोषण की राशि

यह मामला हंसा देवी और अमनदीप सिंह के बीच विवाद से जुड़ा है। महिला ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 24 के तहत अर्जी दाखिल की थी। उसने मुकदमे के खर्च के लिए 30,000 रुपये और हर महीने 10,000 रुपये भरण-पोषण की मांग की। महिला ने दावा किया था कि पति जिम से प्रतिमाह 2 लाख रुपये कमाता है।

सीआरपीएफ में सब-इंस्पेक्टर पद पर तैनात है महिला

पति अमनदीप सिंह के वकील ने कोर्ट में बताया कि महिला खुद काफी पढ़ी-लिखी है। वह वर्तमान में भारतीय सीआरपीएफ में सब-इंस्पेक्टर (स्टाफ नर्स) के पद पर काम कर रही है। महिला की बेसिक सैलरी ही 56,000 रुपये प्रतिमाह से अधिक है, इसलिए वह आर्थिक रूप से पूरी तरह स्वतंत्र और आत्मनिर्भर है।

कोर्ट ने दोनों पक्षों के संपत्ति व आय के हलफनामों को देखने के बाद फैसला दिया। अदालत ने कहा कि जब महिला खुद अच्छा वेतन पा रही है और अपना भरण-पोषण करने में सक्षम है, तो पति से भत्ता दिलाने का कोई तुक नहीं बनता। इन सख्त टिप्पणियों के साथ अदालत ने महिला की याचिका खारिज कर दी।

Right News Desk
Right News Desk
लॉ और पत्रकारिता स्नातक, पत्रकारिता में 11 वर्ष का अनुभव

Read more

Related News