मंडी जिला अदालत ने खारिज की NHAI की याचिका, फोरलेन प्रभावित जमीन मालिक के पक्ष में सुनाया अहम फैसला

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Mandi News: हिमाचल प्रदेश में मंडी की जिला अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की याचिका खारिज कर दी है। अथॉरिटी ने मंडलायुक्त के 18 अक्टूबर 2023 के फैसले को चुनौती दी थी। अदालत ने साफ किया कि मध्यस्थता अवार्ड में हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है।

कुल्लू तहसील के ढोभी गांव निवासी हरि चंद (अब मृत) की जमीन केंद्र सरकार ने नेशनल हाईवे-21 के चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित की थी। अथॉरिटी ने 13 अक्टूबर 2016 को मुआवजा तय किया था। इसके बाद जमीन मालिक ने मुआवजा बढ़ाने की मांग को लेकर आर्बिट्रेटर के पास दावा पेश किया था।

मध्यस्थ ने 18 अक्टूबर 2023 को जमीन का बाजार मूल्य तो नहीं बढ़ाया, लेकिन अधिनियम 2013 की धारा 30(1) और 30(3) के तहत सभी वैधानिक लाभ दिए। इसके साथ ही नौ प्रतिशत और 15 प्रतिशत की दर से ब्याज देने का आदेश जारी किया, जिससे भू-मालिक को बड़ी राहत मिली थी।

NHAI की याचिका पर जिला अदालत का रुख

एनएचएआई ने धारा 34 के तहत अवार्ड को चुनौती देते हुए ब्याज और अतिरिक्त लाभ पर आपत्ति जताई थी। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि धारा 34 के तहत मध्यस्थ के फैसले पर अपील की तरह सुनवाई नहीं हो सकती और इसमें हस्तक्षेप का आधार सीमित है।

कोर्ट ने मध्यस्थ के निर्णय को पूरी तरह तर्कसंगत और कानूनी तौर पर सही पाया। अदालत ने कहा कि आदेश में कोई कानूनी अवैधता नहीं है। इस फैसले से नेशनल हाईवे निर्माण के कारण प्रभावित हुए भू-स्वामियों के अधिकारों को कानूनी तौर पर बड़ी मजबूती मिली है।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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