Kullu News: हिमाचल प्रदेश की ग्राम पंचायतों और नगर निकायों में विकास कार्यों के दौरान जीएसटी वसूली में गंभीर अनियमितताओं का पर्दाफाश हुआ है। ऑडिट जांच में सामने आया है कि कई निकायों ने ठेकेदारों से टैक्स काटकर सरकारी खाते में जमा नहीं कराया, जबकि अन्य स्थानों पर बिना टैक्स काटे ही पूरा भुगतान कर दिया गया।
निरमंड में टैक्स काटकर भी सरकारी खजाने में नहीं किया जमा
नगर पंचायत निरमंड के वित्तीय वर्षों की जांच में भारी गड़बड़ी पकड़ी गई है। यहां ठेकेदारों के बिलों से कुल 7,55,909 रुपये की कटौती की गई थी। इसमें जीएसटी, आयकर, श्रम उपकर और रॉयल्टी शामिल थी। ऑडिट के मुताबिक यह पूरी रकम संबंधित विभागों में जमा कराने के बजाय दबाकर रखी गई, जो गंभीर अनियमितता है।
दूसरी तरफ ग्राम पंचायत गोपालपुर में निर्माण सामग्री खरीद के दौरान अलग ही खेल खेला गया। पंचायत ने ईंट, सीमेंट, रेत और ढुलाई मद में 10.58 लाख रुपये का भुगतान किया। नियमों के अनुसार इस पर तय टीडीएस और जीएसटी काटा जाना था, लेकिन अधिकारियों ने बिना कोई कटौती किए ठेकेदारों को पूरी राशि थमा दी।
सरकार ने लिया कड़ा संज्ञान, जिम्मेदार अधिकारियों से मांगा जवाब
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने मामले पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खरीद प्रक्रिया में जीएसटी अनिवार्य है और सभी वेंडर्स के लिए जीएसटी नंबर अनिवार्य किया गया है। जहां भी नियमों की अनदेखी हुई है, वहां कड़ी जांच के बाद उचित कदम उठाए जाएंगे।
नगर नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि टैक्स काटना और समय पर जमा करना अनिवार्य वैधानिक प्रक्रिया है। सरकारी धन में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा। राज्य लेखा परीक्षा विभाग ने काटी गई रकम तत्काल सरकारी खजाने में जमा कराने का आदेश दिया है।