Mandi News: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मी दत्त बेहरा ने कहा है कि यदि हिमाचल प्रदेश सरकार संस्थान को कुछ वर्षों के लिए दो पहाड़ उपलब्ध करवा दे, तो शोधकर्ता उन्हें पर्यावरण और रोजगार का खजाना बना सकते हैं। इस पहल से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ हजारों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और सरकार के लिए आय के नए स्रोत विकसित होंगे।
वर्ष 2009 में स्थापित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी मंडी) ने अपने शोध और नवाचार के माध्यम से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक विशेष पहचान बनाई है। इसी कड़ी में संस्थान के निदेशक प्रो. लक्ष्मी दत्त बेहरा ने एक विशेष बातचीत में बताया कि पहाड़ों पर बड़े पैमाने पर पर्यावरण अनुकूल गतिविधियों को संचालित करने को लेकर प्रदेश सरकार को एक विशेष प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया या जवाब नहीं मिला है।
दो पहाड़ों पर 10 हजार प्रजातियों के पौधे लगाने की योजना
प्रो. बेहरा ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार द्वारा संस्थान को दो पहाड़ सौंपे जाते हैं, तो वहां लगभग 10 हजार प्रजातियों के पौधे लगाने और विभिन्न प्रकार की पर्यावरण अनुकूल गतिविधियां संचालित करने की योजना है। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, बल्कि प्रदेश सरकार की आर्थिकी को भी मजबूती मिलेगी और आय के नए स्रोत विकसित होंगे।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह एक बेहद क्रांतिकारी पहल साबित हो सकती है। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में बादल फटने, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाओं के पीछे पर्यावरणीय असंतुलन एक बड़ा कारण माना जाता है। ऐसे में पहाड़ों पर बड़े स्तर पर पौधरोपण और सुनियोजित पर्यावरण अनुकूल गतिविधियों के जरिए इस दिशा में बेहद सकारात्मक परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
नई तकनीक से कृषि को मिलेगा बढ़ावा और आवारा पशुओं की समस्या का समाधान
हिमाचल प्रदेश का कृषि क्षेत्र इस समय कई गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। विशेष रूप से आवारा पशुओं और बंदरों के आतंक से परेशान होकर राज्य के कई किसान खेती छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए आईआईटी मंडी लगातार ऐसे महत्वपूर्ण शोध कर रहा है, जिनके जरिए प्रदेश में आधुनिक तकनीक के माध्यम से कृषि को एक नया और आधुनिक स्वरूप दिया जा सके।
प्रो. बेहरा का मानना है कि कम भूमि पर भी आधुनिक तकनीकों का सही इस्तेमाल करके इतनी अधिक पैदावार हासिल की जा सकती है, जिससे हिमाचल प्रदेश देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में अपना एक महत्वपूर्ण योगदान दे सके।
कमांद परिसर का सफल मॉडल
इस दिशा में उदाहरण देते हुए उन्होंने आईआईटी मंडी के कमांद परिसर का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मंडी से संस्थान तक लगभग 20 किलोमीटर के इस पूरे क्षेत्र में सड़कों पर एक भी आवारा गाय-बैल नजर नहीं आता है। इसके पीछे संस्थान द्वारा तैयार की गई एक विशेष गौशाला है, जहां इन सभी पशुओं को सुरक्षित रखा जाता है। इस गौशाला से गोबर और अन्य उपयोगी उत्पादों के माध्यम से न केवल आय अर्जित की जा रही है, बल्कि गोबर गैस तैयार कर उसका सार्थक उपयोग भी किया जा रहा है।