हिमाचल में बिजली कटौती और गलत बिलिंग पर आयोग सख्त, सेवाओं में खामी मिलने पर उपभोक्ताओं को मिलेगा मुआवजा

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने राज्य में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता, अघोषित कटौती और बिलिंग समस्याओं को लेकर उपभोक्ताओं से सीधा फीडबैक मांगा है। आयोग जांचेगा कि बिजली बोर्ड तय मानकों के अनुरूप कार्य कर रहा है या नहीं। यदि सेवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरतीं, तो बोर्ड को मुआवजा देना होगा।

निर्धारित सेवा मानकों पर खरा उतरना बिजली बोर्ड के लिए अनिवार्य

बिजली वितरण कंपनी के लिए आयोग द्वारा निर्धारित सेवा मानकों का पालन करना अनिवार्य बनाया गया है। इसमें निर्बाध बिजली आपूर्ति और शिकायतों का तय समयसीमा में निपटारा शामिल है। नियमों और पात्रता शर्तों के अनुसार, सेवाओं में विफलता पर उपभोक्ता मुआवजे के पात्र होंगे। इससे बोर्ड की सीधी जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी।

उपभोक्ता अपने क्षेत्र में बार-बार बिजली कटने, आपूर्ति बहाली में देरी और बिल में गलत राशि दर्ज होने की शिकायत दर्ज करा सकते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल फीडबैक देने से मुआवजा स्वतः नहीं मिलेगा, इसके लिए निर्धारित शर्तों को पूरा करना आवश्यक होगा। विवरण आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।

शिकायत समाधान और कर्मचारियों के व्यवहार पर भी लिया जाएगा फीडबैक

आयोग यह भी समीक्षा करेगा कि शिकायत दर्ज कराना कितना सुगम है और उसके समाधान में कितना वक्त लगता है। कार्यालयों और फील्ड कर्मचारियों के आचरण, ऑनलाइन बिल भुगतान तथा डिजिटल सेवाओं में आने वाली तकनीकी दिक्कतों पर भी राय मांगी गई है। इससे बोर्ड के प्रशासनिक और तकनीकी तंत्र को अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा।

राज्य बिजली बोर्ड में एक नवंबर से मैनुअल टीए बिल पूरी तरह बंद

प्रशासनिक सुधार के तहत राज्य बिजली बोर्ड ने कर्मचारियों के यात्रा भत्ता बिलों की प्रक्रिया डिजिटल कर दी है। एक नवंबर से कागजी बिल स्वीकार नहीं किए जाएंगे और सारा काम कर्मचारी पोर्टल से होगा। इस व्यवस्था को एसएपी-ईआरपी प्रणाली से जोड़कर बिल सत्यापन और भुगतान रिकॉर्ड को व्यवस्थित व पारदर्शी बनाया गया है।

Desh Raj
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