Shimla News: हिमाचल प्रदेश में सुस्त पड़े मानसून के बीच मौसम विभाग ने फिर बारिश तेज होने का पूर्वानुमान जताया है। राज्य में 31 अगस्त से 3 सितंबर तक कई इलाकों में भारी बारिश की आशंका है। इसके लिए मौसम केंद्र ने येलो अलर्ट जारी किया है।
पिछले 24 घंटों में राज्य के सीमित हिस्सों में ही वर्षा दर्ज की गई। धर्मशाला में सर्वाधिक 73.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। इसके अलावा गुलेर में 29, कांगड़ा में 22.8, नैना देवी में 12.8, जोगिंदरनगर में 11 और नगरोटा सूरियां में 8.4 मिलीमीटर वर्षा हुई। कांगड़ा में बिजली चमकने की घटनाएं हुईं।
राजधानी शिमला समेत अधिकांश जिलों में शनिवार सुबह से बादल छाए हुए हैं। मैदानी इलाकों में बारिश रुकने से उमस भरी गर्मी बढ़ गई है। चालू मानसून सीजन में अब तक सामान्य से 10 फीसदी कम बारिश हुई है। आमतौर पर सितंबर के अंत तक मानसून विदा हो जाता है।
राहत के बीच भूस्खलन से सड़कें अवरुद्ध होने का सिलसिला जारी है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के मुताबिक शनिवार सुबह तक भूस्खलन से 68 सड़कें बंद थीं और सात ट्रांसफार्मर ठप पड़े थे। हालांकि राहत की बात यह है कि किसी भी पेयजल योजना पर असर नहीं पड़ा है।
सड़कों के मामले में मंडी जिला सबसे प्रभावित है, जहां 28 मार्ग बंद हैं। कुल्लू में 16, कांगड़ा में सात, सिरमौर में छह, ऊना में चार, चंबा में तीन, शिमला में दो और बिलासपुर व लाहौल-स्पीति में एक-एक सड़क ठप है। नाहन में पांच ट्रांसफार्मर बंद पड़े हैं।
इस सीजन में बारिश और हादसों के कारण 249 लोगों की जान जा चुकी है और 401 लोग जख्मी हुए हैं। आपदा में 450 मवेशी मारे गए हैं। इसके अलावा 97 घर पूरी तरह तबाह हुए हैं, जबकि 432 मकानों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक आपदा से राज्य को 1,183 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। इसमें सर्वाधिक क्षति लोक निर्माण विभाग को पहुंची है। सड़कों और पुलों के टूटने से विभाग को लगभग 897 करोड़ रुपये का भारी नुकसान सहना पड़ा है।