Shimla News: हिमाचल प्रदेश में हत्या के मामलों में सबसे ज्यादा 21 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवा निशाना बन रहे हैं। नेरचौक मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि आधे से अधिक मामलों में शराब और डंडे, पत्थर जैसे कुंद हथियारों का इस्तेमाल हुआ है।
नेरचौक मेडिकल कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. अभिषेक शर्मा, डॉ. कीर्ति परमार और डॉ. मनोज कुमार शर्मा ने साल 2021 से 2025 तक यह अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने 5 वर्षों में हुए 707 पोस्टमार्टम और पुलिस रिकॉर्ड की जांच कर हत्या के कारणों और परिस्थितियों का विश्लेषण किया।
31 मामलों में 21 से 30 साल के युवा सबसे अधिक प्रभावित
अध्ययन में शामिल 707 पोस्टमार्टम में से 31 मामले हत्या के पाए गए। इनमें 20 पुरुष और 11 महिलाएं थीं। सबसे अधिक 12 मामले (38.71 प्रतिशत) 21 से 30 वर्ष की उम्र के युवाओं के थे। विशेषज्ञों के अनुसार युवाओं में आवेश और आपसी विवाद हिंसक रूप ले रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक 17 मामलों (54.84 प्रतिशत) में सिर पर लगी गंभीर चोट मौत की मुख्य वजह बनी। वहीं 23 मामलों में लाठी, डंडे, लोहे की रॉड, पत्थर, ईंट और हथौड़े जैसे हथियारों का प्रयोग किया गया। इसके अलावा धारदार हथियार, गला घोंटने और जहर देने के मामले भी सामने आए।
शोध में 17 मृतकों के शरीर में शराब की पुष्टि हुई है। यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल ‘जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंड डायग्नोस्टिक रिसर्च’ में प्रकाशित हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि शराब हिंसक झड़पों को बढ़ाती है। पहाड़ी राज्य में निजी रंजिश और घरेलू विवाद ही हत्याओं का मुख्य कारण हैं।
अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह और रोकथाम की रणनीति
अध्ययन में सामने आया कि हिंसक झड़पों के दौरान लोग आसपास मौजूद वस्तुओं को ही हथियार बना लेते हैं। इस 5 साल लंबे अध्ययन के नतीजे पुलिस, फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स और नीति निर्माताओं को अपराध रोकने की नीति बनाने में मदद करेंगे। अभिभावकों को भी अपने बच्चों के प्रति सजग रहने की जरूरत है।