Shimla News: हिमाचल प्रदेश में बटालियनों से अन्य दफ्तरों और जगहों पर तैनात पुलिस जवानों का सितंबर माह का वेतन अटक गया है। इस समस्या को दूर करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने सभी कमांडेंट को लंबित वेतन का जल्द भुगतान करने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है।
पुलिस महानिदेशक ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि वेतन न मिलने से पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को काफी आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। ऐसे में बिना किसी और देरी के रुका हुआ वेतन जारी किया जाना चाहिए। डीजीपी दफ्तर ने 23 सितंबर 2026 के आदेश का हवाला देते हुए तैनाती और हेडक्वार्टर तय करने के नियमों की याद दिलाई है।
यह पूरी व्यवस्था कार्मिक विभाग के 17 जुलाई 2026 के निर्देशों से जुड़ी है। इसके तहत आहरण एवं संवितरण अधिकारी को यह प्रमाणित करना होता है कि कर्मचारी ने महीने में किस जगह पर ड्यूटी की है। डीजीपी ने कहा कि पुलिस सेवा की जरूरतों के मुताबिक जवानों को उनकी मूल बटालियन से अलग-अलग दफ्तरों में भेजा जाता है, जिससे तैनाती की अवधि बदलती रहती है।
एक ही महीने में कई जगह ड्यूटी करने वाले जवानों का भी सत्यापन प्रमाण पत्र बनाया जाएगा। संबंधित कमांडेंट को तैनाती के आदेशों, ड्यूटी के विवरण और जरूरी कागजातों की जांच करनी होगी। जवान ने जिस जगह जितनी अवधि तक काम किया है, उसका सत्यापन करके रिकॉर्ड तैयार होगा। इसके बाद ही वेतन प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
<h2>वेतन बिल सत्यापन के बाद तुरंत कोषागार भेजे जाएंगे</h2>
पुलिस मुख्यालय ने निर्देश दिया है कि रिकॉर्ड और प्रमाण पत्र का सत्यापन पूरा होने के बाद सभी दस्तावेज कोषागार या उपकोषागार अधिकारी को भेजे जाएं। इससे निर्धारित प्रक्रिया के तहत वेतन बिलों पर आगे की कार्रवाई हो सकेगी। यदि इस दौरान कोई तकनीकी समस्या आती है, तो स्पष्टीकरण के लिए अधिकारियों को सक्षम अथॉरिटी से तुरंत संपर्क करने की सलाह दी गई है।
डीजीपी अशोक तिवारी ने सितंबर के लंबित वेतन का भुगतान जल्द कराने के साथ आने वाले महीनों में भी सभी वेतन बिलों की समय पर प्रोसेसिंग सुनिश्चित करने को कहा है। इस सख्त रुख से साफ है कि विभाग अब भविष्य में पुलिस जवानों के वेतन भुगतान में किसी भी तरह की लेट-लतीफी या लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
