Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने मंडी मध्यस्थता योजना के तहत सेब खरीद में बड़ा बदलाव किया है। अब सेब बेचने के लिए बागवानों को अपना पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इसके लिए एक विशेष मोबाइल ऐप लॉन्च की है।
बागवानों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया सोमवार से शुरू होने जा रही है। सेब उत्पादक इस ऐप के जरिए खुद भी अपना पंजीकरण कर सकते हैं। इसके अलावा लोग लोक मित्र केंद्र, बागवानी विभाग के कार्यालय या पंचायत सचिव के पास जाकर भी आवेदन कर सकते हैं।
पंजीकरण के समय बागवानों को अपनी जमीन के दस्तावेज दिखाना जरूरी होगा। सरकार ने पिछले साल हुई कथित गड़बड़ियों को रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए यह कदम उठाया है। अब केवल पंजीकृत बागवानों से ही सेब खरीदा जाएगा। कैबिनेट बैठक में इस पर अंतिम मुहर लगेगी।
यूनिवर्सल कार्टन के बाद सरकार का दूसरा बड़ा कदम
सेब खरीद व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार का यह दूसरा बड़ा प्रयास है। इससे दो साल पहले सरकार ने यूनिवर्सल कार्टन की व्यवस्था लागू की थी। शुरुआत में विरोध के बावजूद अब इससे बागवानों को सीधा फायदा मिल रहा है। इस बार भुगतान सीधे बैंक खाते में होगा।
एचपीएमसी इस योजना के तहत बागवानों से सी-ग्रेड यानी कम गुणवत्ता वाला सेब खरीदता है। इस बार सरकार ने कलेक्शन सेंटरों की संख्या को सीमित कर दिया है। अब तीन-चार पंचायतों को मिलाकर एक कलस्टर बनाया जाएगा, जहां सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में खरीद प्रक्रिया पूरी होगी।
प्रति बागवान सेब खरीद की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव
बागवानी विभाग ने शुरुआत में प्रति बागवान तीस बोरी सेब खरीदने का प्रस्ताव भेजा है। हालांकि सरकार इस सीमा को बढ़ाकर 100 बोरी प्रति बागवान कर सकती है। पिछले साल जरूरत से ज्यादा सेब खरीदने के कारण काफी फसल बर्बाद हो गई थी, इसलिए यह बदलाव किया गया है।