Himachal News: हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दीवाली पर पटाखों से होने वाले प्रदूषण की विस्तृत निगरानी के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। इस बार केवल वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) तक सीमित न रहकर हवा में मौजूद जहरीली गैसों, सूक्ष्म कणों और ध्वनि स्तर की भी गहनता से जांच की जा रही है। 1 नवंबर से शुरू हुआ यह अभियान दीवाली के बाद भी लगातार जारी रहेगा।
त्योहार के दौरान पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने व्यापक तैयारी की है। इस विशेष अभियान के तहत दीवाली से पहले, पर्व के दिन और त्योहार के बाद हवा में पटाखों के धुएं का असर परखा जाएगा। इसके लिए पूरे प्रदेश में 29 विशेष केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से वायु और ध्वनि प्रदूषण पर पैनी नजर रखी जा रही है।
सूक्ष्म कणों और जहरीली गैसों का होगा सटीक विश्लेषण
निगरानी अभियान के दौरान केवल सतही आंकड़ों के बजाय हवा में मौजूद घातक तत्वों की पहचान की जाएगी। इसके तहत पीएम-2.5 और पीएम-10 के स्तर के साथ-साथ सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसों की मात्रा जांची जा रही है। बोर्ड ने सभी संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि हवा में घुलने वाले सूक्ष्म कणों और पटाखों से होने वाले शोर के स्तर का सटीक आंकड़ा तैयार किया जा सके।
उल्लेखनीय है कि पीएम-2.5 ऐसे अति सूक्ष्म कण होते हैं जो सांस के जरिए फेफड़ों के गहरे हिस्सों तक पहुंचकर रक्त प्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं। वहीं पीएम-10 मुख्य रूप से धूल, निर्माण कार्य और धुएं से उत्पन्न होते हैं। इन दोनों प्रदूषकों की तुलनात्मक निगरानी से पटाखों के कारण वायु गुणवत्ता पर पड़ने वाले वास्तविक प्रभाव का वैज्ञानिक आकलन संभव होगा।
रात 8 से 10 बजे तक ही ग्रीन पटाखे, शांत क्षेत्रों में पूर्ण प्रतिबंध
सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, केवल पर्यावरण के अनुकूल ‘ग्रीन पटाखे’ जलाने की अनुमति दी गई है। इनका उपयोग भी केवल रात 8:00 बजे से रात 10:00 बजे के बीच ही किया जा सकेगा। रात 10:00 बजे से अगली सुबह 6:00 बजे तक आतिशबाजी पर पूर्ण प्रतिबंध लागू रहेगा।
इसके अतिरिक्त अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, न्यायालयों और अधिसूचित शांत क्षेत्रों (साइलेंस जोन) के आसपास पटाखे फोड़ने पर पूरी तरह से रोक रहेगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जमीनी स्तर पर इन पाबंदियों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए पुलिस बल को भी निगरानी की विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है।