Mandi News: हिमाचल प्रदेश के जंगलों में ग्लाइफोसेट और पैराकुएट जैसे खतरनाक रसायनों का छिड़काव करके बेमौसमी मटर उगाने का गंभीर मामला सामने आया है। मंडी जिले की थाची रेंज में वन विभाग की टीम ने ऐसी अवैध मटर की फसलों को नष्ट कर दिया है।
पिछले साल थुनाग और जंजैहली क्षेत्रों में भारी बरसात के दौरान आई तबाही के पीछे भी ढलानों पर केमिकल डालकर खेती करने की बात सामने आई थी। ऐसे तरीकों से भूस्खलन का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। सरकार को अब पूरे प्रदेश में बेमौसमी सब्जियों के कारोबार का तुरंत सर्वे करवाना चाहिए।
हिमाचल में वन भूमि पर अतिक्रमण करके खेती करने का पुराना इतिहास रहा है। अस्सी के दशक में सुंदरलाल बहुगुणा के साथ चिपको आंदोलन के दौरान वनों के व्यावसायिक दोहन की प्रक्रिया देखी गई थी। पहले ढलानों से पेड़ कटवाकर आलू और सेब के बगीचे बनाए जाते थे और इमारती लकड़ी की तस्करी होती थी।
नेरवा में उस दौर में बहत्तर हजार लकड़ी के स्लीपर पकड़े गए थे। छाजपुर, जुब्बल और ननखड़ी के चूंजर में पुरानी ढलानों पर अवैध आलू की खेती की जाती थी। पहले हाथ से खुदाई में काफी समय लगता था, लेकिन अब खतरनाक केमिकल्स के छिड़काव से जंगल साफ करके मटर लगाना आसान हो गया है।
सीढ़ीदार खेतों के बिना ढलानों पर सीधे केमिकल से खेती करने से भूमि कटाव बढ़ गया है। बेमौसमी सब्जियों के ऊंचे दाम मिलने से यह मुनाफा कमाने का जरिया बन गया है। वन विभाग और प्रशासन को राजनीतिक संरक्षण की आशंकाओं के बीच तुरंत कड़ी निगरानी रखनी होगी, ताकि वनों को बचाया जा सके।
राज्य सरकार ने प्रदेश के 32 प्रतिशत भू-भाग पर वनीकरण के लिए मिशन 32 प्रतिशत शुरू किया है। हालांकि, 6 से 8 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित दुर्लभ जैव विविधता को इन रसायनों से भारी नुकसान पहुंच रहा है। अगर रासायनिक हमलों को नहीं रोका गया, तो यह लक्ष्य पाना बेहद कठिन होगा।
ग्लाइफोसेट जैसे रसायन सेहत के लिए बेहद जानलेवा हैं और इनसे कैंसर का खतरा बढ़ता है। ये रसायन मिट्टी के उपयोगी जीवाणुओं को नष्ट कर देते हैं, जिससे जमीन की कार्बन सोखने की क्षमता खत्म होती है। इसके अलावा बारिश के पानी से यह जहर बहकर जलस्रोतों और फसलों को दूषित करता है।
केरल सरकार ने इन घातक रसायनों पर पहले ही रोक लगा दी है और केंद्र सरकार ने भी निर्देश जारी किए हैं। सोशल मीडिया पर पेड़ सुखाने वाली दवाओं के विज्ञापनों पर तुरंत बैन लगना चाहिए। हिमालय नीति अभियान ने भी सरकार से इन रसायनों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है।