बिलासपुर में किसान ने मशरूम की खेती से बदली अपनी किस्मत, सरकार से दो किश्तों में मिला 28 लाख का अनुदान

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Bilaspur News: बिलासपुर जिले के झंडूता ब्लॉक स्थित बालघाड़ पंचायत के पराहू गांव के किसान जगदीश वर्मा ने पारंपरिक खेती छोड़ दी है। उन्होंने अब मशरूम उत्पादन को अपनी कमाई का जरिया बना लिया है। साल 2009 में बटन मशरूम से शुरुआत करने वाले जगदीश आज दो चरणों में मिले 28 लाख रुपये के सरकारी अनुदान की बदौलत हर साल लाखों रुपये कमा रहे हैं।

जगदीश ने वर्ष 2017 में अपने मशरूम बिजनेस का बड़े पैमाने पर विस्तार किया। इसके बाद उन्होंने इसमें शिटाके मशरूम का उत्पादन भी शामिल कर लिया। उन्हें 2017-18 में एकीकृत बागवानी विकास मिशन से करीब 8 लाख रुपये मिले थे। इसके बाद 2021-22 में आरकेवीवाई-रफ्तार योजना के जरिए 20 लाख रुपये का अनुदान मिला, जिससे उन्होंने अपना प्रोडक्शन स्ट्रक्चर मजबूत किया।

जगदीश बताते हैं कि पारंपरिक फसलों के मुकाबले मशरूम उत्पादन में बहुत कम जगह की जरूरत होती है। हालांकि, इसमें आमदनी काफी ज्यादा होती है। वह हर साल कई क्विंटल मशरूम पैदा करके बाजार में बेच रहे हैं। इसके साथ ही वह आसपास के दूसरे किसानों को भी पारंपरिक खेती के साथ-साथ इस आधुनिक तकनीक को अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहे हैं।

उनकी इस सफलता को स्थानीय स्तर पर काफी बड़ी पहचान मिली है। जगदीश वर्मा को जिला स्तर पर सर्वश्रेष्ठ किसान पुरस्कार, प्रगतिशील मशरूम उत्पादक सम्मान और कृषि शोधकर्ता एवं किसान मंच सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। पहली बार मिले अनुदान से उन्होंने अपनी बेसिक यूनिट तैयार की थी, जिसके बाद उन्होंने आगे के बड़े विस्तार की मजबूत नींव रखी।

साल 2021-22 में मिली 20 लाख रुपये की बड़ी राशि ने जगदीश को शिटाके जैसी महंगी और ज्यादा डिमांड वाली वैरायटी की खेती करने का हौसला दिया। 2009 में जब उन्होंने काम शुरू किया था, तब यह नया विकल्प था। शुरुआती सालों में मार्केट की समझ बनाने के बाद उन्होंने सरकारी स्कीम की मदद से अपना कारोबार बढ़ाया।

हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में समतल जमीन काफी सीमित है। ऐसे में मशरूम उत्पादन किसी छोटे कमरे या शेड में भी आसानी से हो सकता है। बटन मशरूम की तुलना में शिटाके मशरूम की बाजार में डिमांड और कीमत दोनों बहुत ज्यादा हैं। बिलासपुर बागवानी विभाग की योजनाओं का लाभ उठाकर अन्य छोटे किसान भी कम बजट में अपनी यूनिट शुरू कर सकते हैं।

बागवानी विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जगदीश जैसे प्रगतिशील किसानों का असर पूरे इलाके पर पड़ रहा है। उन्हें देखकर आसपास के गांवों के लोग भी इस तकनीक को सीखने के लिए आगे आ रहे हैं। इससे पूरे क्षेत्र में मशरूम की खेती का एक मजबूत नेटवर्क तैयार हो रहा है, जिससे कम जोत वाले किसानों को एक्स्ट्रा इनकम मिल रही है।

Mohit
Mohit
पत्रकारिता के क्षेत्र में 9 सालों का अनुभव।

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