New Delhi News: नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान पश्चिम एशिया संकट के बीच एक बड़ा कूटनीतिक सुधार देखने को मिला है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद के बीच सकारात्मक वार्ता हुई। दोनों नेताओं ने आपसी मतभेद भुलाकर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति जताई है।
ईरानी दूतावास द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने इस द्विपक्षीय बातचीत को अत्यंत सकारात्मक बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान की संयुक्त अरब अमीरात या खाड़ी के अन्य पड़ोसी मुल्कों से कोई निजी दुश्मनी नहीं है। उन्होंने सभी पड़ोसी मुल्कों को भाई जैसा करार देते हुए आपसी सहयोग बढ़ाने का संदेश दिया।
होर्मुज स्ट्रेट व्यापार समझौते पर ओमान में होगी वार्ता
राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मौजूदगी पर आपत्ति जताते हुए पड़ोसी देशों से अपनी जमीन का उपयोग न होने देने की अपील की। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि खाड़ी देशों का होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान से वार्ता करना उनका निजी फैसला है और उन्हें इस पर कोई एतराज नहीं।
दोनों नेताओं के बीच यह अहम मुलाकात ओमान में खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) और ईरान के बीच होने वाली बैठक से ठीक पहले हुई है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट के जरिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा प्रवाह और जहाजरानी की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस वार्ता से ऐतिहासिक समझौते की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।
नई दिल्ली घोषणापत्र में संप्रभुता और संयम पर दिया जोर
सम्मेलन के समापन पर सभी ग्यारह सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से नई दिल्ली घोषणापत्र को स्वीकार किया। साझा दस्तावेज में पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव पर चिंता जताते हुए शांति और संयम बरतने की अपील की गई। सभी देशों ने नागरिक बुनियादी ढांचे और संप्रभुता की सुरक्षा पर विशेष बल दिया।
ब्रिक्स देशों ने ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों और आम नागरिकों से जुड़े ठिकानों पर हमलों की कड़ी निंदा की। घोषणापत्र में क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करते हुए सभी विवादों को कूटनीतिक संवाद से सुलझाने की वकालत की गई। इस घोषणा से संघर्ष विराम की वैश्विक कोशिशों को नया संबल मिलने की उम्मीद है।