पुरुषों में पेशाब रुकने और बार-बार हाजत महसूस होने के कारण, जानिए यूरोलॉजिस्ट की राय

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New Delhi News: कम उम्र के पुरुषों में पेशाब का वेग होने के बावजूद यूरिन पास न होना या रुक-रुक कर आना कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ. विनीत मल्होत्रा के अनुसार, यह समस्या प्रोस्टेट की सूजन (प्रोस्टेटाइटिस), यूरिनरी ट्रैक्ट में स्टोन, पेल्विक मांसपेशियों के खिंचाव या नसों की अति-सक्रियता के कारण हो सकती है।

युवा और कामकाजी पुरुषों में पेशाब का तेज दबाव महसूस होने के बाद भी यूरिन पास न हो पाना या अत्यधिक जोर लगाने पर ही पेशाब निकलना एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है। कई मामलों में शुरुआती दिनों में इस तरह के लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन समय पर ध्यान न देने पर यह समस्या गंभीर रूप ले लेती है और पेट के निचले हिस्से या कमर में तेज दर्द के साथ अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आ जाती है। जांच के दौरान अक्सर पेशाब की नली में पथरी या संक्रमण की पुष्टि होती है।

वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट और एंड्रोलॉजिस्ट डॉ. विनीत मल्होत्रा के अनुसार, युवाओं में पेशाब रुकने या बार-बार इच्छा होने के मुख्य रूप से चार बड़े कारण होते हैं:

प्रोस्टेट की सूजन और संक्रमण (प्रोस्टेटाइटिस)

बुजुर्गों में 55 वर्ष की आयु के बाद प्रोस्टेट ग्रंथि का आकार बढ़ना (बीपीएच) सामान्य है, लेकिन युवाओं में इसका मुख्य कारण प्रोस्टेट में संक्रमण और सूजन (प्रोस्टेटाइटिस) होता है। यह समस्या आमतौर पर उन लोगों में अधिक देखी जाती है जो काम के सिलसिले में लंबे समय तक पेशाब रोककर रखते हैं। इसके अतिरिक्त, सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (एसटीडी) भी प्रोस्टेट ग्रंथि में संक्रमण और सूजन का कारण बन सकती है।

पेल्विक मांसपेशियों का खिंचाव और ब्लैडर नेक ऑब्सट्रक्शन

जो लोग अत्यधिक भारी व्यायाम या कठोर शारीरिक श्रम करते हैं, उनकी मांसपेशियां जरूरत से ज्यादा तनाव में रहती हैं। पेल्विक फ्लोर और जननांगों की मांसपेशियों के लगातार कसे रहने से ‘ब्लैडर नेक ऑब्सट्रक्शन’ की स्थिति बन जाती है। ऐसी स्थिति में पेशाब की थैली एक बार में पूरी तरह खाली नहीं हो पाती, जिसके कारण व्यक्ति को बार-बार पेशाब जाने की इच्छा होती है। जननांगों में पूर्व में लगी कोई चोट भी पेशाब के मार्ग में रुकावट पैदा कर सकती है।

यूरिनरी ट्रैक्ट में स्टोन और नसों की अति-सक्रियता

गुर्दे या मूत्रमार्ग में पथरी होने पर भी यह परेशानी उत्पन्न होती है। जब 5 से 6 मिमी से छोटे स्टोन यूरेटर (मूत्र नली) या यूरेथ्रा में आकर फंसते हैं या हिलते-डुलते हैं, तो तेज दर्द के साथ पेशाब का प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है।

इसके अलावा, कुछ मामलों में शारीरिक रुकावट न होने पर भी ब्लैडर की नसें अत्यधिक संवेदनशील हो जाती हैं। इसे ‘ओवरएक्टिव ब्लैडर’ कहा जाता है। इसमें पेशाब की थैली भरी न होने पर भी मस्तिष्क को बार-बार यूरिन पास करने का सिग्नल मिलता रहता है।

उपचार और बचाव के उपाय

डॉ. मल्होत्रा के मुताबिक, अधिकांश मामलों में संक्रमण और सूजन का इलाज दवाओं द्वारा संभव होता है। हालांकि, यदि पथरी मूत्रमार्ग (यूरेथ्रा) में फंस गई हो या चोट व संक्रमण के कारण पेशाब की नली सिकुड़ गई हो (यूरेथ्रल स्ट्रिक्चर), तो दवाओं के बजाय सर्जरी के जरिए रुकावट को ठीक किया जाता है।

इस प्रकार की समस्याओं से बचाव के लिए जीवनशैली में सुधार बेहद जरूरी है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, नियमित समय पर पेशाब करना, अत्यधिक नमक, रेड मीट और प्रिजर्वेटिव्स युक्त प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना इस समस्या के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है।

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