Solan News: धूम्रपान करने वाले लोगों में समय से पहले मोतियाबिंद होने का खतरा दो से तीन गुना तक बढ़ गया है। क्षेत्रीय अस्पताल सोलन की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सीमा नेगी के अनुसार, आमतौर पर 40 से 50 वर्ष की आयु में दिखने वाले यह लक्षण अब युवाओं में भी तेजी से सामने आने लगे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के शोध से भी यह खुलासा हुआ है कि धूम्रपान करने वालों में सामान्य लोगों की तुलना में पांच से छह वर्ष पहले ही मोतियाबिंद की शुरुआत हो जाती है। सोलन अस्पताल में हर महीने 15 से 20 युवा इस तरह की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक है।
शरीर में फ्री रेडिकल्स बढ़ने से आंखों को नुकसान
डॉक्टरों के अनुसार धूम्रपान से शरीर में फ्री रेडिकल्स की मात्रा बढ़ जाती है। ये फ्री रेडिकल्स आंखों के लिए आवश्यक जरूरी प्रोटीन को नष्ट करने लगते हैं। इसके अलावा धूम्रपान के चलते आंखों तक उचित पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते हैं, जिससे समय से पहले आंखों के लेंस पर सफेदपन आने लगता है।
नेत्र विशेषज्ञों ने साफ किया है कि मोतियाबिंद पर किसी भी दवा का असर नहीं होता और ऑपरेशन ही इसका एकमात्र इलाज है। डॉ. सुमित सूद और आईजीएमसी शिमला के प्रोफेसर डॉ. प्रवीण ने सलाह दी है कि समय से पहले मोतियाबिंद से बचने के लिए तुरंत धूम्रपान छोड़ें और लक्षण दिखते ही जांच कराएं।
