Health News: नवरात्र के दौरान लोग व्रत रखकर अपने खानपान में बड़े बदलाव करते हैं। कुट्टू, राजगिरा, समक चावल और फलों को डाइट में शामिल किया जाता है। भक्ति के अलावा कई लोग इसे वजन घटाने और बॉडी डिटॉक्स का जरिया मानते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार इससे जुड़े कई भ्रम सेहत बिगाड़ सकते हैं।
अक्सर माना जाता है कि नौ दिनों के उपवास से शरीर पूरी तरह डिटॉक्सिफाई हो जाता है। हकीकत में मानव शरीर के पास अपना इनबिल्ट डिटॉक्स सिस्टम होता है, जिसमें लिवर और किडनी मुख्य भूमिका निभाते हैं। व्रत रखने से कोई अतिरिक्त टॉक्सिन बाहर नहीं निकलता, केवल फल और सब्जियां पोषण की गुणवत्ता बढ़ाते हैं।
तला-भुना खाना और अचानक वजन घटने का सच
उपवास को तेजी से वजन घटाने का आसान तरीका मानना भी एक गलत धारणा है। अगर व्रत के दौरान अधिक तला-भुना, चिप्स, नमकीन या भारी मिठाइयां खाई जाएं तो वजन कम होने के बजाय बढ़ सकता है। अचानक दिखने वाली वजन की गिरावट फैट बर्न होने से नहीं, बल्कि शरीर में डिहाइड्रेशन के कारण होती है।
तेजी से परिणाम पाने के चक्कर में दिनभर भूखे रहना सेहत के लिए खतरनाक साबित होता है। इससे सिरदर्द, अत्यधिक कमजोरी, एसिडिटी और बाद में ज्यादा खाने की आदत पनपती है। डायबिटीज के मरीजों, गर्भवती महिलाओं और किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को बिना डॉक्टरी सलाह के कभी भी लंबा उपवास नहीं रखना चाहिए।
व्रत के दौरान संतुलित पोषण और सही दिनचर्या
उपवास का सबसे सही और सुरक्षित तरीका पर्याप्त पानी पीना और संतुलित भोजन लेना है। दिनभर ऊर्जावान बने रहने के लिए दूध, दही, पनीर, ताजे फल और सूखे मेवे सीमित मात्रा में खाएं। व्रत को वजन घटाने का कोई शॉर्टकट न समझें, बल्कि इसे सात्विक और अनुशासित जीवनशैली के रूप में अपनाएं।
