Mumbai News: बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने अपनी आगामी फिल्म ‘पारिवारिक मनोरंजन’ की रिलीज से पहले अभिनय और सिनेमा को लेकर अपने विचार साझा किए हैं। मुंबई के गोरेगांव ईस्ट में को-स्टार अदिति राव हैदरी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि किरदार की तैयारी हफ्तों में हो सकती है, लेकिन एक परिपक्व अभिनेता बनने में 15 से 20 साल की साधना लगती है।
बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘पारिवारिक मनोरंजन’ को लेकर चर्चा में हैं। अपनी सहज और प्रभावशाली अभिनय शैली के लिए पहचाने जाने वाले पंकज त्रिपाठी का मानना है कि अभिनय सिर्फ किसी एक किरदार को समझने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवनभर चलने वाली निरंतर सीखने की प्रक्रिया है।
मुंबई के गोरेगांव ईस्ट में अपनी सह-कलाकार अदिति राव हैदरी के साथ समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान उन्होंने अभिनय की प्रक्रिया पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी फिल्म में काम करते समय कलाकार को तैयारी के लिए एक से तीन हफ्ते का समय मिल सकता है, जिसमें वह पटकथा पढ़कर किरदार को आत्मसात करता है। लेकिन एक संपूर्ण अभिनेता के रूप में खुद को स्थापित करने के लिए वर्षों का अनुभव आवश्यक होता है।
बढ़ई के उदाहरण से समझाई अभिनय की गहराई
पंकज त्रिपाठी ने अभिनय और अनुभव के रिश्ते को बढ़ई के काम का उदाहरण देकर समझाया। उन्होंने कहा कि एक कुर्सी बनाने में महज चार दिन लग सकते हैं, लेकिन उस बढ़ई को पूरी दक्षता के साथ कुर्सी बनाना सीखने में चार साल का लंबा समय लगता है। ठीक उसी तरह किसी किरदार की तात्कालिक तैयारी कुछ हफ्तों में पूरी हो सकती है, लेकिन एक मंझा हुआ अभिनेता बनने के पीछे 15 से 20 वर्षों की कड़ी साधना और मेहनत होती है।
दर्शकों की व्यक्तिगत पसंद पर सिनेमा का पैमाना नहीं
बातचीत के दौरान अभिनेता ने दर्शकों की बदलती पसंद और सोशल मीडिया पर फिल्मों की समीक्षाओं पर भी अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अक्सर फिल्ममेकर्स और कलाकार इस असमंजस में रहते हैं कि दर्शक वास्तव में क्या देखना चाहते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति को कोई विशेष खाना पसंद नहीं है, तो इसका यह अर्थ कतई नहीं है कि वह खाना खराब है; यह केवल उसकी अपनी व्यक्तिगत पसंद है। सोशल मीडिया और इंटरनेट पर भी यही प्रवृत्ति दिखती है, जहां कई बार लोग किसी कहानी को तुरंत नकार देते हैं, जबकि संभव है कि कुछ समय बाद वही कहानी उन्हें पसंद आने लगे।
‘घर के बने सादे खाने जैसा है फिल्म का सिनेमा’
अपनी आने वाली फिल्म ‘पारिवारिक मनोरंजन’ के स्वरूप पर बात करते हुए पंकज त्रिपाठी ने इसे ‘घर के बने खाने जैसा सिनेमा’ करार दिया। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से एक साफ-सुथरी और सहज फिल्म है, जिसे पूरे परिवार के साथ बैठकर देखा जा सकता है। वर्तमान समय में फिल्मों की तेज रफ्तार एडिटिंग और दर्शकों के घटते ध्यान के दौर में यह फिल्म एक अलग और सुकून देने वाले अंदाज में दर्शकों के सामने आएगी।