New Delhi News: टीवी अभिनेता अर्जुन बिजलानी ने त्योहारों के महत्व पर बात करते हुए बताया कि वह दीपावली का पर्व पारंपरिक तरीके से परिवार के साथ मनाते हैं। उन्होंने कहा कि काम की व्यस्तता के बीच अपनों के लिए समय निकालना जरूरी है और एक छत के नीचे परिवार के साथ बिताए पल ही सबसे खास होते हैं।
टेलीविजन अभिनेता अर्जुन बिजलानी इन दिनों अपने शोज़ और विभिन्न प्रोजेक्ट्स को लेकर काफी व्यस्त चल रहे हैं। हालांकि, काम की इस व्यस्तता के बीच भी वह परिवार के साथ समय बिताने का कोई अवसर नहीं छोड़ते। अभिनेता का मानना है कि त्योहारों का मौसम रोजमर्रा की व्यस्त दिनचर्या से थोड़ा विराम लेने और अपने परिवार के साथ यादगार पल साझा करने का सबसे बेहतर अवसर होता है।
हाल ही में समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में अर्जुन बिजलानी ने साझा किया कि उनके घर में दीपावली का उत्सव किस तरह मनाया जाता है और उम्र के साथ इस पर्व को लेकर उनके दृष्टिकोण में क्या बदलाव आए हैं।
घर पर पूजा, सजावट और पारंपरिक अंदाज में दीपावली
अर्जुन बिजलानी ने बताया कि उनके लिए दीपावली का पर्व हमेशा से परिवार के साथ जुड़ने का जरिया रहा है। वह आमतौर पर घर पर ही रहकर त्योहार मनाना पसंद करते हैं। इस दौरान परिवार के सभी सदस्य मिलकर पारंपरिक रूप से पूजा-अर्चना करते हैं और पूरे घर को सजाते हैं।
इसके साथ ही घर में विशेष पकवान बनाए जाते हैं और सभी लोग एक साथ बैठकर भोजन व उत्सव का आनंद लेते हैं। अर्जुन ने कहा कि काम में अत्यधिक व्यस्त रहने के बावजूद वह त्योहारों पर परिवार के लिए समय निकालने का पूरा प्रयास करते हैं, क्योंकि घर में हंसी-खुशी का माहौल होना सबसे महत्वपूर्ण है।
काम और निजी जीवन में संतुलन जरूरी
अभिनेता का मानना है कि पेशेवर व्यस्तताओं और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक है। वह अपने काम का शेड्यूल इस प्रकार तय करने की कोशिश करते हैं कि प्रमुख त्योहारों के दौरान परिवार के साथ उपस्थित रह सकें। अर्जुन के अनुसार, काम अपनी जगह जरूरी है, लेकिन जीवन में जिन लोगों का महत्व है, उनके लिए वक्त निकालना भी उतना ही अनिवार्य है। दिन के अंत में अपनों के साथ बिताए गए पल काम जितने ही कीमती साबित होते हैं।
उम्र के साथ बदला त्योहार का दृष्टिकोण
दीपावली से जुड़े अनुभवों को साझा करते हुए अर्जुन ने बताया कि बचपन में उनके लिए इस त्योहार का अर्थ नए कपड़े, मिठाइयां, आतिशबाजी और रिश्तेदारों से मिलना हुआ करता था। हालांकि, बड़े होने के बाद उन्हें इस पर्व का वास्तविक अर्थ समझ में आया।
अब उनके लिए दीपावली केवल रोशनी और बाहरी उल्लास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंधकार पर प्रकाश की विजय, उम्मीद और सकारात्मकता का प्रतीक है। अभिनेता का कहना है कि यह त्योहार कठिन परिस्थितियों में भी हौसला बनाए रखने, जीवन में आगे बढ़ते रहने और जीवन में मौजूद सकारात्मक चीजों के प्रति आभार व्यक्त करने की प्रेरणा देता है।
एक छत के नीचे परिवार का होना ही असली खुशी
दीपावली की सबसे प्रिय स्मृतियों का जिक्र करते हुए अर्जुन ने कहा कि जब पूरा परिवार एक ही छत के नीचे उपस्थित होता है, तो वह क्षण सबसे यादगार बन जाता है। त्योहार की वास्तविक प्रसन्नता केवल सजावट या खान-पान में नहीं, बल्कि अपनों के साथ होने में है। परिवार के साथ हंसी-मजाक करना और नई यादें संजोना ही किसी भी पर्व को खास बनाता है।