Mandi News: आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने मानव त्वचा की तरह काम करने वाली आर्टिफिशियल इलेक्ट्रॉनिक स्किन बनाई है। यह ई-स्किन बेहद संवेदनशील होने के साथ खुद बिजली पैदा कर सकती है। इस नई खोज से भविष्य में एडवांस रोबोट और आधुनिक पहनने योग्य डिवाइस बनाना आसान हो जाएगा।
स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रो. सतिंदर कुमार शर्मा के नेतृत्व में यह रिसर्च हुई है। टीम में बबलेश गुप्ता, दीपिका गुप्ता, नरेंद्र कुमार धर और गोपी ए रेड्डी शामिल रहे। यह महत्वपूर्ण शोध एडवांस्ड मैटेरियल्स साइंस एंड टेक्नोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
बिना बैटरी के खुद बिजली बनाएगी यह नई ई-स्किन
वैज्ञानिकों ने माइक्रोचैनल्ड ट्राइबोइलेक्ट्रिक नैनोजेनरेटर तकनीक से इस समस्या का हल खोज निकाला है। यह लचीली ई-स्किन इंसानी स्पर्श और शारीरिक गतिविधियों से बिजली उत्पन्न करती है। इससे रोबोट्स में भारी बैटरियों की जरूरत खत्म हो जाएगी और उनका वजन काफी हल्का हो जाएगा।
परीक्षण के दौरान ई-स्किन ने 5.6 माइक्रोएम्पीयर करंट, 39.9 वोल्ट वोल्टेज और 0.44 मिलीवाट पावर जनरेट की। इसे बनाने के लिए ग्राफीन नैनोप्लेटलेट्स, पॉलीविनाइल अल्कोहल और सोडियम नाइट्रेट का कंडक्टिंग जेल इस्तेमाल किया गया है। यह त्वचा भारी दबाव, तापमान और कठोरता को आसानी से पहचान सकती है।
प्रोस्थेटिक्स मरीजों और रोबोटिक्स के लिए होगी बेहद मददगार
शोधकर्ताओं ने इस ई-स्किन को रोबोटिक आर्म से जोड़कर सफल प्रयोग किया। रोबोट ने सतह की बनावट, वस्तुओं की पहचान और तापमान का सटीक अनुमान लगाया। प्रो. सतिंदर कुमार शर्मा ने बताया कि यह तकनीक भविष्य में कृत्रिम अंग इस्तेमाल करने वाले मरीजों के लिए काफी मददगार साबित होगी।