Mandi News: भूकंप, भूस्खलन, खदानों की गहराई या केमिकल प्लांट में गैस रिसाव जैसी खतरनाक परिस्थितियों में बिना इंसानी जान जोखिम में डाले सटीक जानकारी हासिल करना हमेशा बड़ी चुनौती रहा है। अब आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने ड्रोन और चार पैरों वाले (क्वाड्रापेडल) रोबोट की शानदार जुगलबंदी तैयार कर इस समस्या का समाधान ढूंढ लिया है।
ड्रोन बनेगा आंखें और रोबोट बढ़ाएगा कदम
खतरनाक खदानों और आपदा वाले स्थानों पर अब इंसानों को भेजे बिना आसानी से निगरानी की जा सकेगी। इससे मौत और रास्ते में भटकने का डर पूरी तरह खत्म हो जाएगा। आमतौर पर जमीन पर चलने वाले रोबोट्स की देखने की क्षमता काफी सीमित होती है। सामने ऊंची दीवार, बड़ा पत्थर या खाई आते ही वे अक्सर दिशा भटक जाते हैं।
इस नई तकनीक में ड्रोन, रोबोट की आंखें बनकर काम करता है। ड्रोन में लगे हाईटेक आरजीबी-डी कैमरे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हवा से ही पूरे क्षेत्र का 3डी मैप तैयार कर लेते हैं। रास्ते में फैले पत्थरों, सीढ़ियों, दलदल या रेत की पहचान करके ड्रोन जमीन पर चल रहे रोबोट को तुरंत रियल-टाइम निर्देश भेजता है।
0.025 सेकंड में रास्ता चुनेगा रोबोट
निर्देश पाते ही रोबोट बिना रुके अपनी चाल और रास्ता खुद ही बदल लेता है। इस खोज का मुख्य आधार शोधकर्ताओं द्वारा विकसित किया गया मोबाइल प्रोब पोटेंशियल फील्ड (एमपीपीएफ) एल्गोरिदम है। अक्सर ऑटोमैटिक रोबोट मुश्किल मोड़ों पर अटक जाते हैं, लेकिन मूविंग सरफेस चार्ज मॉडल से शोधकर्ताओं ने इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला है।
अब यह रोबोटिक जोड़ी महज 0.025 सेकंड में अपना सुरक्षित रास्ता चुन लेती है। लैब टेस्ट के दौरान इस रोबोट ने सीढ़ियों, पथरीले रास्तों और रेत को बिना किसी झटके के आसानी से पार किया। यह तकनीक बेहद जटिल भौगोलिक स्थितियों में भी तेजी से काम करने में पूरी तरह सक्षम साबित हुई है।
आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सुरक्षा में गेम चेंजर
आईआईटी मंडी के सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स के प्रो. अमित शुक्ला के नेतृत्व में दर्शन कुमार प्रजापति, अंकित मेहरा, पुष्कर कुमार, आशीष राणा और एसके सूर्याप्रकाश ने यह सफलता हासिल की है। यह शोध अंतरराष्ट्रीय जर्नल ‘आईईईई एक्सेस’ में प्रकाशित हुआ है और टीम ने पेटेंट के लिए आवेदन किया है।
प्रो. डॉ. अमित शुक्ला ने बताया कि खदानों, ऑयल रिफाइनरी, कंस्ट्रक्शन साइट्स और न्यूक्लियर प्लांट में बिना इंसानी जान जोखिम में डाले 24 घंटे निगरानी करना चुनौतीपूर्ण काम है। ड्रोन और रोबोट की यह जुगलबंदी आने वाले समय में आपदा प्रबंधन और औद्योगिक सुरक्षा के क्षेत्र में गेम चेंजर साबित होगी।