महादेव सट्टेबाजी ऐप: भिलाई में जूस दुकान से शुरू होकर दुबई तक फैला अवैध नेटवर्क, ED जांच में बड़े खुलासे

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Bhilai News: प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में महादेव ऑनलाइन बुक के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर के नेटवर्क को लेकर अहम खुलासे हुए हैं। भिलाई में जूस दुकान पर काम करने से शुरुआत करने वाले चंद्राकर ने दुबई से ऑनलाइन सट्टेबाजी का अवैध साम्राज्य खड़ा किया, जिसके जरिए करीब 90 हजार करोड़ रुपये के अवैध लेन-देन के आरोप सामने आए हैं।

महादेव ऑनलाइन बुक (MOB) के जरिए बड़े पैमाने पर चलाए गए ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखे हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क का मुख्य संचालक सौरभ चंद्राकर मूल रूप से छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला है। उसने अपने सहयोगी रवि उप्पल के साथ मिलकर इस सट्टेबाजी सिंडिकेट की नींव रखी और बाद में इसका मुख्यालय संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दुबई में स्थापित कर कारोबार का संचालन शुरू किया।

भिलाई की जूस दुकान से दुबई तक का सफर

प्रवर्तन निदेशालय के दस्तावेजों के अनुसार, सौरभ चंद्राकर का परिवार पहले भिलाई में ‘जूस फैक्ट्री’ नाम से एक दुकान चलाता था। सौरभ भी इसी दुकान पर काम करता था, जहां उसके चाचा के बयान के अनुसार उसे प्रतिमाह लगभग 15 हजार रुपये मिलते थे। जांच में दर्ज बयानों के मुताबिक, दिसंबर 2020 तक वह स्थानीय स्तर पर छोटे पैमाने पर सट्टेबाजी गतिविधियों से जुड़ा रहा। इसके बाद उसने तकनीक का इस्तेमाल करते हुए महादेव ऑनलाइन बुक प्लेटफॉर्म का तेजी से विस्तार किया, जहां क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस और कार्ड गेम्स जैसे कई खेलों पर ऑनलाइन दांव लगवाए जाने लगे।

दुबई से संचालित पैनल व्यवस्था और कार्यप्रणाली

जांच एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, महादेव ऐप का संचालन दुबई स्थित मुख्यालय से होता था। देश-विदेश में कारोबार फैलाने के लिए फ्रेंचाइजी मॉडल की तर्ज पर अलग-अलग ऑपरेटरों को पैनल बांटे जाते थे। एक पैनल हासिल करने के लिए ऑपरेटर से शुरुआत में करीब 15 से 20 लाख रुपये लिए जाते थे। इसके बाद बैंक खाते, सिम कार्ड, इंटरनेट कनेक्शन और कर्मचारियों की व्यवस्था संबंधित पैनल ऑपरेटर को खुद करनी होती थी।

ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए व्हाट्सएप, टेलीग्राम, सोशल मीडिया अभियानों और विशेष कॉल सेंटरों का सहारा लिया जाता था। ED के अनुमान के मुताबिक, भारत और यूएई में करीब 3,200 पैनल संचालित किए जा रहे थे। इन पैनलों से होने वाले कुल लाभ का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा हवाला और फर्जी बैंक खातों के जरिए दुबई मुख्यालय भेजा जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि जब कोई खिलाड़ी बड़ा दांव जीतता था, तो उसकी यूजर आईडी ब्लॉक कर दी जाती थी जिससे वह अपनी जीती हुई राशि नहीं निकाल पाता था।

हजारों करोड़ रुपये के अवैध लेन-देन का आकलन

ED के दस्तावेजों में महादेव ऑनलाइन बुक और उससे जुड़े अन्य सहयोगी प्लेटफॉर्म्स के जरिए भारी वित्तीय लेन-देन का ब्योरा दिया गया है। एजेंसी के अनुसार, महादेव ऑनलाइन बुक से लगभग 75,000 से 80,000 करोड़ रुपये, स्काईएक्सचेंज से करीब 11,000 से 12,000 करोड़ रुपये और लोटस-365 से लगभग 2,400 करोड़ रुपये के दांव लगाए गए। इन सभी आंकड़ों को मिलाकर कुल टर्नओवर करीब 88,000 से 94,000 करोड़ रुपये आंका गया है। एजेंसी का दावा है कि इनमें से करीब 4,000 से 5,000 करोड़ रुपये भारत से अवैध रूप से यूएई में बैठे सिंडिकेट संचालकों तक पहुंचाए गए। मामले में कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच जारी है।

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