New Delhi News: दिल्ली के उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी ज़ोमैटो पर सेवा में गंभीर लापरवाही के लिए 8,250.61 रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने यह कड़ा फैसला एक ग्राहक के दो खाने के ऑर्डर मनमाने ढंग से रद्द करने और पैसे वापस न करने के मामले में सुनाया है।
जन्मदिन पार्टी के दौरान रद्द किए ऑर्डर
अगस्त 2024 में मनोज कुमार ने अपनी भतीजी के जन्मदिन पर पांच अलग-अलग ऑर्डर दिए थे। इनमें से तीन ऑर्डर तो पहुंच गए, लेकिन 250.61 रुपये मूल्य के दो ऑर्डर नहीं दिए गए। कंपनी ने ग्राहक का फोन न मिलने का बहाना बनाकर ऑर्डर रद्द कर दिए और कैंसलेशन फीस का हवाला देकर रिफंड रोक लिया।
आयोग ने कहा कि मनोज कुमार ज़ोमैटो गोल्ड के सदस्य थे और बेहतर सेवा के हकदार थे। इसके बावजूद खाना न पहुंचाना और ऊपर से कैंसलेशन चार्ज काटना सीधे तौर पर सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है। कंपनी तय समय में आयोग के सामने पेश होकर अपना जवाब दाखिल करने में भी विफल रही।
मुआवजा और कानूनी खर्च देने का आदेश
उपभोक्ता फोरम ने कंपनी की गैर-हाजिरी पर एकतरफा सुनवाई करते हुए शिकायतकर्ता के हलफनामे और चैट सबूतों को सही माना। आयोग ने ज़ोमैटो को मानसिक उत्पीड़न के लिए 5,000 रुपये और कानूनी खर्च के रूप में 3,000 रुपये देने का निर्देश दिया।
इसके साथ ही कंपनी को रद्द किए गए ऑर्डर के 250.61 रुपये छह फीसदी सालाना ब्याज सहित लौटाने होंगे। फोरम ने ज़ोमैटो को पूरी राशि का भुगतान 45 दिनों के भीतर करने का सख्त आदेश दिया है। इस फैसले से ऐप आधारित डिलीवरी कंपनियों की मनमानी पर लगाम लगेगी।