हिमाचल में जनता से वसूला गया 118 करोड़ से अधिक का सेस खजाने में नहीं हुआ जमा, ऑडिट रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

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Shimla News: हिमाचल प्रदेश में जनता से पर्यावरण, दूध और प्राकृतिक खेती के नाम पर वसूला गया सेस तय सरकारी खाते में समय पर जमा नहीं कराया गया। वित्त पर जारी लेखापरीक्षा प्रतिवेदन 2024-25 में 27.58 करोड़ के बिजली और 91.37 करोड़ के शराब सेस को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितता उजागर हुई है।

ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक सरकार पर जमा आरक्षित फंड और विभिन्न देनदारियों की 101.61 करोड़ रुपये की राशि पर 21.83 करोड़ रुपये का ब्याज भी बकाया पाया गया। जनता की जेब से वसूले गए इस पैसे को तय समय पर संबंधित विभागों और सरकारी खाते में ट्रांसफर नहीं करने पर ऑडिट ने कड़े सवाल उठाए हैं।

राज्य बिजली बोर्ड ने नवंबर 2024 से लागू दूध और पर्यावरण सेस के तहत वर्ष 2024-25 में 27.58 करोड़ रुपये जुटाए। इसमें 12.65 करोड़ रुपये दूध सेस और 14.93 करोड़ रुपये पर्यावरण सेस के थे। नियमों के तहत इस पूरी रकम को सरकार की संचित निधि में तुरंत जमा किया जाना बेहद अनिवार्य था।

बिजली बोर्ड ने नियमों को दरकिनार करते हुए इस पूरी रकम को अपने चालू खाते में ही दबाए रखा। अगस्त 2025 में बोर्ड ने दलील दी कि कैश फ्लो की कमी के चलते सरकार ने इस फंड को अपनी देनदारी के सामने एडजस्ट किया था। हालांकि लेखापरीक्षा ने इस पूरी प्रक्रिया को वित्तीय नियमों के पूरी तरह खिलाफ ठहराया।

इधर आबकारी एवं कराधान विभाग ने शराब की बिक्री और निर्यात से 166.54 करोड़ रुपये का सेस वसूला। इसमें 141.92 करोड़ दूध सेस और 24.62 करोड़ प्राकृतिक खेती सेस शामिल था। विभाग ने पशुपालन विभाग को सिर्फ 75.17 करोड़ रुपये दिए, जबकि बाकी 91.37 करोड़ रुपये मार्च 2025 तक लाभार्थी विभागों तक नहीं पहुंच सके।

Right News Desk
Right News Desk
लॉ और पत्रकारिता स्नातक, पत्रकारिता में 11 वर्ष का अनुभव

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