Delhi News: अमेरिका के नए प्रतिबंध प्रस्ताव ने भारत की रूस से तेल खरीद को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में सस्ता रूसी तेल देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जाता है।
अमेरिकी टैरिफ का भारतीय निर्यात और व्यापार पर प्रभाव
यदि यह प्रस्तावित प्रावधान लागू होता है, तो अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर भारी शुल्क लग सकता है। इससे कपड़ा, रत्न-आभूषण और इंजीनियरिंग सामान जैसे प्रमुख क्षेत्रों का निर्यात महंगा हो जाएगा। हालांकि, पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियों और रिफाइनिंग लागत पर निर्भर करेगा।
रूसी तेल से भारत की बचत और दैनिक आयात के आंकड़े
जून 2026 में भारत ने रूस से प्रतिदिन लगभग 26 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा, जो कुल आयात का 53.5 प्रतिशत था। ब्रेंट क्रूड के मुकाबले डिस्काउंट मिलने से भारतीय रिफाइनरों को काफी फायदा होता है। हालांकि, माल ढुलाई और बीमा लागत जैसे कारक वास्तविक बचत के आंकड़ों को प्रभावित करते हैं।
भारत के पास मौजूद विकल्प और भविष्य की रणनीतियां
यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है। यदि रूस से खरीद महंगी होती है, तो भारत इराक, सऊदी अरब या अमेरिका जैसे विकल्पों की ओर रुख कर सकता है। हालांकि, कूटनीतिक बातचीत और आयात स्रोतों में विविधता लाना ही भारत के लिए सबसे बेहतर रास्ता होगा।