Business News: केंद्र सरकार भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 में संशोधनों की तैयारी कर रही है। यदि ये संशोधन लागू होते हैं, तो यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फिर से लागू हो सकता है। एक नए सर्वे के अनुसार, शुल्क लगने पर आधे से अधिक यूजर्स 3,000 रुपये से ऊपर के यूपीआई लेन-देन छोड़ सकते हैं।
धारा 10A में संशोधन से हटेगा ‘जीरो MDR’ का प्रावधान
प्रस्तावित संशोधन के माध्यम से सरकार को धारा 10A के तहत लागू ‘जीरो MDR’ प्रावधान हटाने का अधिकार मिल जाएगा। वर्ष 2020 से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए यूपीआई और रूपे कार्ड लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट शून्य रखा गया है। नया कानून बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को शुल्क वसूलने की अनुमति देगा।
व्यापारियों पर पड़ेगा बोझ, ग्राहकों के लिए रहेगा नि:शुल्क
प्रस्तावित विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि यूपीआई का उपयोग करने वाले ग्राहकों पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। एमडीआर का पूरा वित्तीय बोझ व्यापारियों को ही उठाना होगा। इसके बावजूद, लोकलसर्किल्स के सर्वे में पाया गया कि 53 प्रतिशत यूजर्स मर्चेंट पर शुल्क लगने के बाद बड़े भुगतान के लिए वैकल्पिक माध्यम चुन सकते हैं।
लोकलसर्किल्स सर्वे में यूजर्स ने बताए ये विकल्प
देश के 322 जिलों में किए गए इस सर्वे में 45,000 से अधिक लोगों की राय ली गई। इसमें 27 प्रतिशत लोगों ने क्रेडिट कार्ड, 14 प्रतिशत ने डेबिट कार्ड और 12 प्रतिशत ने बैंक ट्रांसफर या कैश को प्राथमिकता देने की बात कही। केवल 12 प्रतिशत यूजर्स ने कहा कि वे हर स्थिति में यूपीआई का इस्तेमाल जारी रखेंगे।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए जरूरी कदम
वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार शून्य एमडीआर ने देश में डिजिटल पेमेंट को अपनाने में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में हो रहे लेन-देन के सुरक्षा और तकनीकी बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाए रखने के लिए यह संशोधन एक टिकाऊ बिजनेस मॉडल तैयार करने में मददगार साबित हो सकता है।