Mumbai News: भारतीय रिजर्व बैंक की विशेष रियायती स्वैप योजना ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में बड़ी सफलता हासिल की है। जुलाई महीने के अंत तक इस योजना के माध्यम से कुल 40.82 अरब अमेरिकी डॉलर का विदेशी मुद्रा प्रवाह सफलतापूर्वक दर्ज किया गया है।
केंद्रीय बैंक ने जारी एक बयान में पुष्टि की कि आठ जून से लगातार विदेशी पूंजी का आगमन बना हुआ है। बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा इस रियायती खिड़की के प्रति जबरदस्त रुझान देखा गया, जिससे देश की आर्थिक स्थिति को काफी संबल प्राप्त हुआ है।
विदेशी मुद्रा अनिवासी जमा से मिला सबसे बड़ा योगदान
विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) यानी एफसीएनआर (बी) जमा योजनाओं ने इस कुल जुटाए गए कोष में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। कुल प्राप्त राशि में से अकेले एफसीएनआर (बी) का योगदान 36.725 अरब डॉलर रहा, जो निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।
इसके अलावा विदेशी मुद्रा उधारी (ओएफसीबी) माध्यम से लगभग 2.575 अरब डॉलर जुटाए गए। वहीं बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) मार्ग से 1.516 अरब डॉलर प्राप्त हुए, जिससे केंद्रीय बैंक के अनुमानों के मुताबिक वांछित लक्ष्य बहुत आसानी से पूरा हो सका।
भुगतान संतुलन को मजबूत करने के लिए उठाए कदम
देश के भुगतान संतुलन को मजबूती देने और बाहरी परिसंपत्तियों को बढ़ाने के उद्देश्य से रिजर्व बैंक ने पांच जून को कई बड़े नीतिगत उपायों का ऐलान किया था। इनमें नए एफसीएनआर (बी) जमा और अन्य उधारी साधनों के लिए रियायती दरें शामिल थीं।
अधिकृत डीलर बैंकों से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस स्वैप सुविधा के तहत 31 जुलाई तक जुटाई गई कुल राशि 40.816 अरब डॉलर तक पहुंच गई। केंद्रीय बैंक का मानना है कि इससे बाजार में तरलता बनाए रखने में मदद मिलेगी।