लाहौर में रखी गई थी देश के पहले स्वदेशी बैंक की नींव, लाला लाजपत राय ने खुलवाया था पहला खाता

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New Delhi News: देश के पहले स्वदेशी बैंक की चर्चा में अक्सर लोग भारतीय स्टेट बैंक का नाम लेते हैं। हालांकि, भारत का पहला पूर्ण स्वदेशी बैंक पंजाब नेशनल बैंक रहा है। साल 1894 में लाहौर में लाला लाजपत राय और उनके राष्ट्रवादी साथियों ने मिलकर इसकी स्थापना की थी।

अंग्रेजी हुकूमत के दौर में भारतीय पूंजी का इस्तेमाल विदेशी बैंक और कंपनियां अपने फायदे के लिए कर रही थीं। भारतीयों को अपनी ही बचत पर सिर्फ मामूली ब्याज मिलता था। इस स्थिति को बदलने के लिए आर्य समाज के राय मूल राज ने सबसे पहले स्वदेशी बैंक की सोच सामने रखी थी।

लाहौर में हुई थी पीएनबी की ऐतिहासिक स्थापना

राय मूल राज के प्रस्ताव पर लाला लाजपत राय ने देशभक्त साथियों को पत्र भेजकर बैंक बनाने की अपील की थी। इसके बाद 19 मई 1894 को दो लाख रुपये की अधिकृत पूंजी के साथ पंजाब नेशनल बैंक का गठन हुआ। बैंक में शुरुआती नौ कर्मचारी थे और कुल वेतन 320 रुपये था।

बैंक का विधिवत कामकाज 12 अप्रैल 1895 से लाहौर में शुरू हुआ था। इसके पहले बोर्ड में सरदार दयाल सिंह मजीठिया, लाला हरकिशन लाल, काली प्रसन्न रॉय और ईसी जेसावाला शामिल थे। विभिन्न धर्मों और क्षेत्रों के दिग्गजों ने एकजुट होकर इस राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान की मजबूत नींव तैयार की थी।

लाला लाजपत राय बने पहले खाताधारक

लाहौर के अनारकली बाजार में खुले पहले दफ्तर में लाला लाजपत राय ने सबसे पहला खाता खुलवाया था। बाद में महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू ने जलियांवाला बाग समिति का खाता इसी बैंक में संचालित किया। देश विभाजन के ठीक पहले 1947 में बैंक का मुख्य दफ्तर दिल्ली शिफ्ट कर दिया गया था।

आजादी के बाद बैंक ने भारत बैंक और इंडो-कमर्शियल बैंक का विलय कर अपनी स्थिति बेहद मजबूत कर ली। साल 1969 में जब इस बैंक का सरकारीकरण हुआ, तब तक इसकी कुल जमा राशि 355 करोड़ रुपये पार कर चुकी थी। इस तरह स्वदेशी आंदोलन से निकला यह बैंक देश का प्रमुख वित्तीय स्तंभ बना।

Desh Raj
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