Business News: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। मध्य पूर्व में तनाव और रूसी तेल आपूर्ति पर अमेरिकी नीति की अनिश्चितता ने बाजार में हलचल बढ़ा दी है। हालांकि, वित्तीय शोध फर्म गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, आपूर्ति में सुधार होने पर 2027 तक ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत घटकर 80 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में 20 अक्टूबर को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया और भाव 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गए। सुबह के कारोबार में ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल पर रहा, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत 103.64 डॉलर प्रति बैरल दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में नरमी के बाद मध्य पूर्व में सुरक्षा संकट और रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कीमतों में तेजी आई।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से संवेदनशील हैं, क्योंकि भारत अपनी कुल पेट्रोलियम जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ता है, जिसका सीधा असर घरेलू महंगाई, माल ढुलाई लागत और कॉर्पोरेट मार्जिन पर पड़ता है। बाजार विशेषज्ञों की नजर इस बात पर है कि कीमतें 110 डॉलर के स्तर से ऊपर टिकती हैं या मुनाफावसूली से नीचे आती हैं।
रूस पर अमेरिकी नीति को लेकर बाजार में असमंजस
कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित करने वाला एक प्रमुख कारण रूस से तेल की आपूर्ति को लेकर अमेरिकी रुख है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जारी एक आदेश में रूस से जुड़े कुछ प्रतिबंधों और शुल्कों में छूट देने का संकेत दिया गया था, जिसमें रूसी हाइड्रोकार्बन खरीदने वाले देशों पर संभावित जुर्माने में नरमी शामिल थी।
हालांकि, बाद में इस पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी। अमेरिकी प्रशासन और विदेश मंत्री मार्को रुबियो की ओर से आए बयानों से संकेत मिला कि मामले के व्यापक आकलन के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। बाजार अब इस बात पर नजर रखे हुए है कि क्या वैश्विक बाजार में रूसी कच्चे तेल का प्रवाह बढ़ेगा। नीति स्पष्ट होने तक कीमतों में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।
मध्य पूर्व में सुरक्षा संकट से आपूर्ति बाधित होने की आशंका
मिडिल ईस्ट क्षेत्र में ताजा भू-राजनीतिक घटनाओं ने ऊर्जा बाजार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। यमन के हूती समूह ने सऊदी अरब के प्रमुख ऊर्जा संयंत्रों, हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है, जिनमें यानबू स्थित अरामको केंद्र, शायबाह ऑयलफील्ड और रियाद का किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शामिल बताए गए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इसके अलावा, यमन के शाबवा प्रांत में एक सैन्य प्रशिक्षण शिविर पर हुए घातक हमले में व्यापक जनहानि की सूचना सामने आई है। इस अस्थिरता ने क्षेत्रीय स्तर पर तेल आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने का जोखिम पैदा कर दिया है, जिसके चलते तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर बना हुआ है।
2027 तक क्या रहेगा कच्चे तेल का रुख? गोल्डमैन सैक्स का अनुमान
गोल्डमैन सैक्स रिसर्च (Goldman Sachs Research) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अगले एक वर्ष में कच्चे तेल की कीमतों में क्रमिक गिरावट देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट का मानना है कि मध्य पूर्व से आपूर्ति व्यवस्था में धीरे-धीरे सुधार होने से बाजार में उपलब्धता बढ़ेगी।
गोल्डमैन सैक्स के ग्लोबल कमोडिटी रिसर्च के को-हेड डान स्ट्रूयवेन के मुताबिक, दिसंबर 2026 तक ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 90 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है। वहीं, साल 2027 के लिए ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया गया है।
रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि यदि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव दोबारा बढ़ता है, तो तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तरों पर टिकी रह सकती हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
