Delhi News: लोकसभा ने गुरुवार को विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच ‘कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक 2026’ पास कर दिया। यह विधेयक सरकार को बैंकों और सेवा प्रदाताओं द्वारा यूपीआई व अन्य इलेक्ट्रॉनिक भुगतान पर शुल्क लगाने की अनुमति देने का अधिकार प्रदान करता है।
कानून में बदलाव से खुलेगा एमडीआर का रास्ता
इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य उस मौजूदा कानूनी प्रावधान को हटाना है, जो बैंकों को अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान पर ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ लगाने से रोकता है। आरटीजीएस और एनईएफटी पर पहले से ही सेवा शुल्क लगता है। हालांकि, अब तक यूपीआई लेनदेन को ऐसे शुल्कों से पूरी तरह छूट मिली हुई थी।
विधेयक के कानून बनने के बाद सरकार मर्चेंट डिस्काउंट रेट के रूप में चार्ज तय कर सकती है। फिलहाल एमडीआर की दर कितनी होगी, इस पर कोई फैसला नहीं हुआ है। डिजिटल लेनदेन की सुविधा देने वाली कंपनियां कारोबारियों से जो फीस लेती हैं, उसे ही एमडीआर कहा जाता है।
ग्राहकों पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष असर
नियमों के अनुसार कोई भी कारोबारी ग्राहकों से सीधे एमडीआर वसूल नहीं कर सकता है। यह शुल्क कारोबारियों को ही देना होता है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि इसका अप्रत्यक्ष बोझ अंततः ग्राहकों पर ही पड़ेगा। वहीं भुगतान उद्योग का कहना है कि इससे डिजिटल पेमेंट सिस्टम अधिक टिकाऊ बनेगा।
डेटा सेंटर और विदेशी निवेश को मिलेगा बढ़ावा
इस विधेयक का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, विदेशी निवेश, डेटा सेंटर, डिजिटल भुगतान और पूंजी बाजार को बढ़ावा देना भी है। विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए कई मंजूरी संबंधी शर्तें हटाई गई हैं। अब डेटा सेंटर लीज या किराये पर भी संचालित किए जा सकेंगे, जिससे भारत एआई हब बन सकेगा।