31 जुलाई तक ITR न भरने पर लगेगा भारी जुर्माना, जानिए बिलेटेड रिटर्न के नियम और पुराने कानून की अनिवार्यता

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Delhi News: वेतनभोगी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और कैपिटल गेन से कमाई करने वाले टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है। ई-फाइलिंग पोर्टल के 21 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 3.15 करोड़ से अधिक रिटर्न भरे जा चुके हैं।

इनमें से 2.96 करोड़ से अधिक आईटीआर का सत्यापन हो चुका है, जबकि 1.87 करोड़ रिटर्न प्रोसेस भी किए जा चुके हैं। पोर्टल पर 14 करोड़ से अधिक टैक्सपेयर्स रजिस्टर्ड हैं। यदि आपने अब तक रिटर्न फाइल नहीं किया है, तो समय सीमा समाप्त होने से पहले यह प्रक्रिया पूरी कर लें।

31 जुलाई की डेडलाइन छूटने पर बिलेटेड रिटर्न का विकल्प

यदि कोई टैक्सपेयर 31 जुलाई की समय सीमा चूक जाता है, तो वह 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर सकता है। हालांकि, लेट फाइलिंग पर हर महीने बकाया टैक्स पर 1 प्रतिशत का ब्याज लगेगा। इसके अलावा, करदाताओं को वित्तीय नुकसान भी झेलना पड़ेगा।

वार्षिक आय 5 लाख रुपये से अधिक होने पर 5,000 रुपये और 5 लाख रुपये तक की आय पर 1,000 रुपये लेट फीस देनी होगी। इसका सबसे बड़ा नुकसान यह है कि टैक्सपेयर शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी में हुए कैपिटल लॉस को अगले वर्षों के लिए कैरी फॉरवर्ड नहीं कर सकेंगे।

नया कानून लागू होने के बाद भी 1961 के अधिनियम से क्यों भरा जा रहा ITR

देश में नया आयकर कानून 2025 लागू हो चुका है, लेकिन मौजूदा आईटीआर फाइलिंग कर निर्धारण वर्ष (असेसमेंट ईयर) 2026-27 के लिए की जा रही है। यह रिटर्न वित्तीय वर्ष 2025-26 (1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026) में हुई कमाई पर आधारित है।

उस अवधि के दौरान आयकर अधिनियम 1961 ही लागू था, इसलिए टैक्स कैलकुलेशन, छूट और कटौतियों के नियम पुराने कानून के हिसाब से ही तय होंगे। नए कानून के तहत पहला रिटर्न अगले साल 1 अप्रैल 2026 से शुरू हुए कर वर्ष की कमाई के लिए दाखिल किया जाएगा।

Desh Raj
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