Mumbai News: देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के वित्तीय परिणाम घोषित किए हैं। इस अवधि में बेहतर रेवेन्यू दर्ज करने के बाद भी बढ़ती लागत और ईंधन मार्केटिंग पर भारी दबाव के कारण दोनों ही दिग्गजों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।
एचपीसीएल को जून तिमाही में हुआ बड़ा वित्तीय नुकसान
एचपीसीएल ने जून तिमाही में 12,265 करोड़ रुपए का समेकित शुद्ध घाटा दर्ज किया है, जबकि बीते साल समान तिमाही में 4,111 करोड़ रुपए का नेट प्रॉफिट मिला था। हालांकि, परिचालन से मिलने वाला रेवेन्यू लगभग 21 प्रतिशत बढ़कर 1.45 लाख करोड़ रुपए रहा, लेकिन लागत में उछाल ने मुनाफे को पूरी तरह से समाप्त कर दिया।
बीपीसीएल को 15 तिमाहियों के बाद पहला नुकसान
दूसरी तरफ बीपीसीएल को पहली तिमाही में 3,962 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा सहना पड़ा। यह लगातार 15 तिमाहियों के बाद पहला मौका है जब कंपनी को नुकसान हुआ है। पिछले साल इसी अवधि में 6,123 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ मिला था। हालांकि रेवेन्यू 1.59 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया, लेकिन मार्केटिंग प्रेशर भारी रहा।
दोनों कंपनियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और घरेलू स्तर पर ईंधन के दामों में सीमित बदलाव का असर सीधे मार्जिन पर पड़ा। एलपीजी की बिक्री पर भी अंडर-रिकवरी का बड़ा बोझ रहा। जून तिमाही में एचपीसीएल ने 3,607 करोड़ रुपए और बीपीसीएल ने 3,485 करोड़ रुपए का एलपीजी अंडर-रिकवरी घाटा दर्ज किया।
इसके विपरीत रिफाइनिंग सेगमेंट का प्रदर्शन बेहतर रहा और एचपीसीएल का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन बढ़कर 23.80 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। लेकिन मार्केटिंग के नुकसान ने इस बढ़त को बेअसर कर दिया। कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि चुनौतियों के बावजूद आपूर्ति सामान्य रही और रिफाइनिंग क्षमता विस्तार तथा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश योजनाएं जारी रहेंगी।