कमोडिटी बाजार में भारी बिकवाली: 12 महीने के निचले स्तर पर सोना-चांदी, MCX पर बड़ी गिरावट

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Delhi News: मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी बिकवाली के चलते सोने और चांदी की कीमतों में तीव्र गिरावट दर्ज की गई है। चांदी करीब 5 प्रतिशत टूटकर 1.79 लाख रुपये प्रति किलोग्राम और सोना लगभग 3 प्रतिशत फिसलकर 1.38 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है। वैश्विक स्तर पर निवेशकों की मुनाफावसूली और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के प्रभाव से दोनों धातुएं 12 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई हैं।

घरेलू कमोडिटी बाजार में अचानक तेज बिकवाली का दबाव बनने से सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर देर शाम हुए कारोबार में चांदी के दिसंबर फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट में करीब 5 फीसदी यानी 10 हजार रुपये से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के बाद चांदी का भाव घटकर लगभग 1.79 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया।

वहीं, सोने की कीमतों में भी लगभग 3 प्रतिशत यानी करीब 4,200 रुपये की गिरावट दर्ज की गई। इसके चलते MCX पर सोना टूटकर 1,38,250 रुपये से 1,38,400 रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार करता दिखा। दोनों कीमती धातुओं के भाव 12 महीनों के निचले स्तर पर आने से आभूषण खरीदारों और लंबे समय से दरों में कमी की प्रतीक्षा कर रहे उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी दबाव

घरेलू बाजार के साथ-साथ विदेशी बाजारों में भी कीमती धातुओं में भारी बिकवाली देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव 3.3 प्रतिशत से अधिक टूटकर 3,900 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया और कारोबार के दौरान 3,880 डॉलर प्रति औंस के आसपास दर्ज किया गया।

इसी तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चांदी में भी 5.12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे इसके दाम 49 से 49.70 डॉलर प्रति औंस के दायरे में आ गए।

गिरावट के प्रमुख वैश्विक कारण

कमोडिटी बाजार के जानकारों के अनुसार, कीमतों में इस बड़ी गिरावट का मुख्य कारण निवेशकों द्वारा की गई भारी मुनाफावसूली है। इसके अलावा अमेरिका से सामने आए मजबूत जीडीपी आंकड़ों और मुद्रास्फीति के दबाव ने भी बाजार का रुख बदल दिया है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती, कच्चे तेल के ऊंचे स्तर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त ने सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है।

साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अधिकारियों द्वारा सख्त ब्याज दरों को लेकर दिए गए संकेतों ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बने रहने की आशंका के चलते कई निवेशक कीमती धातुओं से पूंजी निकालकर अन्य निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में बाजार की दिशा वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और अमेरिकी डॉलर की चाल पर निर्भर करेगी।

Desh Raj
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