Business News: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध की आग फैलने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल एक बार फिर उबलने लगा है। ब्रेंट क्रूड तेजी से 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े की ओर बढ़ रहा है। इससे भारत में आम जनता के लिए पेट्रोल और डीजल सस्ता होने की उम्मीदों को करारा झटका लगा है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर शैंपू से लेकर सड़क निर्माण तक कई क्षेत्रों पर पड़ता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, कच्चे तेल में प्रति बैरल 10 डॉलर की बढ़ोतरी होने से तेल कंपनियों को प्रति लीटर करीब 6 रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। इससे भारतीय बाजार में कीमतें बढ़ने की आशंका बढ़ गई है।
ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के पार, अमेरिका-ईरान तनाव से सप्लाई पर मंडराया संकट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान पर नए हमलों की चेतावनी और अमेरिकी तेल भंडारों में बड़ी गिरावट के बाद दामों में भारी उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 7.91 फीसदी की जोरदार तेजी के साथ 90.74 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 84.43 डॉलर पर बना हुआ है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों का ईरान को करारा जवाब दिया जाएगा। कूटनीतिक जानकार मान रहे हैं कि यह संघर्ष लंबे समय तक खिंच सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) को लेकर दोनों देशों में गतिरोध बरकरार है और युद्धविराम की कोशिशें पूरी तरह से नाकाम साबित हुई हैं।
अमेरिकी तेल रिजर्व में रिकॉर्ड गिरावट, लाल सागर और मिस्र में भी बड़े हमले
अमेरिका के वाणिज्यिक कच्चे तेल के भंडार में मिड-जून के बाद सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा देश का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) लगातार 18वें हफ्ते घटकर 1983 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। ऊर्जा बाजार में इस आपूर्ति संकट की वजह से नई अनिश्चितता पैदा हो गई है।
इसी बीच यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की नाकाबंदी करने की धमकी दी है। उधर मिस्र के एक प्रमुख बंदरगाह पर हुए ड्रोन हमलों के कारण प्राकृतिक गैस ले जा रहे दो बड़े पोतों में भीषण आग लग गई। लगातार बिगड़ते वैश्विक हालातों के कारण आने वाले दिनों में तेल की कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है।