महाराष्ट्र एफडीए ने सिप्ला के पुणे वेयरहाउस का लाइसेंस किया रद्द, दवा रखरखाव में गंभीर लापरवाही का आरोप

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Pune News: महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने दिग्गज फार्मा कंपनी सिप्ला पर बड़ी कार्रवाई की है। नियामक ने पुणे स्थित वेयरहाउस का बिक्री और वितरण लाइसेंस रद्द कर दिया। दवाओं के रख-रखाव, पैकेजिंग और एक्सपायरी स्टॉक प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं मिलने के बाद यह कड़ा कदम उठाया गया है।

यह मामला पुणे के वाडकी स्थित सिप्ला के वेयरहाउस से जुड़ा है। बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर नियामक ने मामले की समीक्षा की थी। इसके बाद नया कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। पूरी प्रक्रिया और सुनवाई के बाद 1 अक्टूबर को वेयरहाउस का लाइसेंस रद्द करने का अंतिम आदेश जारी हुआ।

शेड्यूल एच दवा रिएक्टिन प्लस की पैकेजिंग पर विवाद

विवाद का मुख्य कारण ‘रिएक्टिन प्लस’ दवा की पैकेजिंग रही, जो शेड्यूल एच श्रेणी में आती है। अधिकारियों के मुताबिक इस पर पर्चे के बिना तुरंत दर्द निवारक होने के दावे छपे थे। नियमों के उल्लंघन पर एफडीए ने करीब 11.2 लाख रुपये की दवाएं जब्त कर वापस मंगवाई थीं।

जांच के दौरान वेयरहाउस में दवाओं के डिब्बे सीधे फर्श पर धूल में रखे मिले। इसके अलावा अनिवार्य निरीक्षण पुस्तिका भी मौजूद नहीं थी। सबसे बड़ी लापरवाही यह सामने आई कि एक्सपायर हो चुकी दवाओं को ‘बिक्री के लिए नहीं’ वाले अलग जोन में सुरक्षित नहीं रखा गया था।

अधिकारियों को भौतिक स्टॉक और कंप्यूटर रिकॉर्ड में भारी अंतर मिला, जिसमें कई एंटीबायोटिक्स भी शामिल थीं। डिजिटल रिकॉर्ड के कंपनी के तर्क को एफडीए ने खारिज कर दिया। एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने स्पष्ट किया कि सप्लाई चेन में सुरक्षा और गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं होगा।

सिप्ला ने फैसले को निराशाजनक बताया समीक्षा जारी

कार्रवाई पर सिप्ला ने कहा कि वह मरीजों की सुरक्षा और उच्च गुणवत्ता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कंपनी ने फैसले को निराशाजनक बताते हुए दावा किया कि वेयरहाउस सभी स्टोरेज प्रोटोकॉल का पालन करता है। कंपनी आदेश की समीक्षा कर रही है और कानूनी विकल्पों पर विचार करेगी।

Desh Raj
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