New Delhi News: अगस्त महीने की शुरुआत में जहां व्यावसायिक गैस सिलेंडरों के दाम घटने से व्यवसायियों को राहत मिली है, वहीं घरेलू एयरलाइन कंपनियों को तगड़ा झटका लगा है। सरकार ने विमान ईंधन यानी एटीएफ की कीमतों में पांच रुपये प्रति लीटर की सीधी बढ़ोतरी कर दी है।
दरों में इस नई बढ़ोतरी के बाद घरेलू उड़ानों के लिए इस्तेमाल होने वाले विमान ईंधन का रेट 110 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 115 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है। इससे विमानन कंपनियों के परिचालन खर्च में उल्लेखनीय इजाफा देखने को मिलेगा।
एयरलाइंस के बजट पर एटीएफ का सबसे बड़ा असर
विमानन क्षेत्र की कंपनियों के कुल परिचालन खर्च में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले विमान ईंधन का ही होता है। ईंधन की कीमतों में थोड़ी सी भी बढ़ोतरी कंपनियों के कुल वार्षिक बजट और दैनिक संचालन लागत को बहुत भारी रूप से प्रभावित करती है।
इस फैसले के बाद अब निकट भविष्य में हवाई यात्रा के किरायों में बढ़ोतरी होने की प्रबल आशंका जताई जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि टिकटों के रेट केवल एटीएफ की दरों पर निर्भर नहीं करते, बल्कि कई अन्य व्यावसायिक कारक भी प्रभावित करते हैं।
क्या होता है एटीएफ और इसका प्रभाव
एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ एक विशेष प्रकार का शुद्ध ईंधन होता है, जिसका उपयोग केवल हवाई जहाजों को उड़ाने में किया जाता है। जब भी इस ईंधन की दरों में संशोधन होता है, तो इसका सीधा असर एविएशन सेक्टर की कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर पड़ता है।
इसी वजह से एटीएफ के दामों में किसी भी तरह का बदलाव होने पर शेयर बाजार में लिस्टेड विमानन कंपनियों के शेयरों और हवाई किराए पर विश्लेषकों की गहरी नजर बनी रहती है। फिलहाल नए रेट तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।