Meerut News: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। मेरठ में सोमवार, 2 नवंबर को आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 4 मंडलों के 18 जिलों की चुनावी तैयारियों का जायजा लिया गया। बैठक में मतदाता सूची सुधार, संवेदनशील बूथों की सुरक्षा, अधिकारियों के तबादले और चुनाव प्रबंधन पर कड़े निर्देश जारी किए गए।
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले 18वीं विधानसभा के चुनाव को लेकर प्रशासनिक तंत्र ने समय रहते सक्रियता बढ़ा दी है। भारत निर्वाचन आयोग ने तैयारियों की शुरुआत पश्चिमी उत्तर प्रदेश से की है। इसी क्रम में मेरठ में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता भारत निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग ने की। बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा समेत आयोग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस बैठक में मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद और अलीगढ़ मंडलों के 18 जिलों की चुनावी तैयारियों, कानून-व्यवस्था और मतदान प्रबंधन की गहन समीक्षा की गई।
वेस्ट यूपी से शुरुआत का रणनीतिक महत्व
उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा में पश्चिमी यूपी के इन 18 जिलों की लगभग 110 सीटें राजनीतिक और प्रशासनिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। अंतरराज्यीय सीमाओं से सटे होने, संवेदनशील और अति-संवेदनशील बूथों की अधिक संख्या और कानून-व्यवस्था की चुनौतियों के चलते निर्वाचन आयोग ने प्राथमिक स्तर पर इस क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित किया है। आयोग का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी, त्रुटिहीन और निष्पक्ष बनाने के लिए जमीनी स्तर पर अग्रिम व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना है।
मतदाता सूची के विशेष शुद्धिकरण पर जोर
बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिरहित बनाना रहा। आयोग ने उपस्थित जिला निर्वाचन अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए:
- ASDD मतदाताओं का सत्यापन: अनुपस्थित (Absent), स्थानांतरित (Shifted), दोहरी प्रविष्टि वाले (Duplicate) और मृत (Deceased) मतदाताओं के नाम नियमानुसार सूची से हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
- खारिज फॉर्म-6 की पुनः समीक्षा: मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने निर्देश दिया कि नए मतदाता पंजीकरण के लिए आए जो फॉर्म-6 खारिज हुए हैं, उनकी दोबारा जांच की जाए ताकि कोई भी पात्र नागरिक मताधिकार से वंचित न रहे।
- युवा मतदाताओं का पंजीकरण: 11वीं, 12वीं कक्षा और डिग्री कॉलेजों में विशेष अभियान चलाकर 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नए मतदाताओं के नाम जोड़ने पर बल दिया गया।
3 साल से जमे अधिकारियों के तबादले की समीक्षा
चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आयोग ने ‘3 साल के नियम’ की भी समीक्षा की। इसके तहत एक ही जिले या पद पर तीन वर्ष या उससे अधिक समय से पदस्थापित अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण की स्थिति देखी गई। चुनाव कार्य से सीधे जुड़े ऐसे सभी अधिकारियों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर तबादला सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था और संवेदनशील बूथों की निगरानी
बैठक में सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए विशेष कार्ययोजना पर चर्चा की गई। सभी 18 जिलों में संवेदनशील बूथों की पहचान कर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने का खाका तैयार किया गया है। इसके अलावा, चुनावों के दौरान प्रलोभन और अवैध शराब के वितरण को रोकने के लिए शराब कारखानों (डिस्टिलरीज) के उत्पादन और निकासी बिंदुओं पर सख्त निगरानी रखने को कहा गया है। पड़ोसी राज्यों और सीमावर्ती जिलों के अधिकारियों के साथ निरंतर अंतर-जिला समन्वय बैठकें आयोजित करने के भी आदेश दिए गए हैं।
ईवीएम रख-रखाव और बूथों पर आधुनिक सुविधाएं
समीक्षा के दौरान ईवीएम (EVM) और वीवीपीएटी (VVPAT) मशीनों की उपलब्धता, प्रथम स्तरीय जांच (FLC) और तकनीकी पहलुओं की जानकारी ली गई। इसके साथ ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की सुविधा के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे की समीक्षा हुई। मतदान के दिन पोलिंग बूथों पर मोबाइल फोन जमा करने के लिए स्वयंसेवकों के सहयोग से टोकन और लॉकर व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया गया।
इस बैठक में मंडलायुक्तों, पुलिस आयुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों (आईजी), पुलिस उपमहानिरीक्षकों (डीआईजी), जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीएम) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (एसएसपी/एसपी) ने हिस्सा लिया। मेरठ मंडल से शुरू हुआ यह समीक्षा अभियान आगामी दिनों में राज्य के अन्य मंडलों और जिलों में भी चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। मौजूदा 18वीं उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त हो रहा है।