Jwalamukhi news : हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की ग्राम पंचायत सलिहार में नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की जमीन को लेकर विवाद बढ़ गया है। ग्रामीणों ने पंचायत प्रधान पर मांग पत्र की रिसीविंग न देने का आरोप लगाया है। नाराज ग्रामीणों ने विकास खंड अधिकारी सुराणी को लिखित शिकायत सौंपकर इस मामले में तुरंत दखल देने की मांग की है।
सलिहार पंचायत में नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए भूमि चयन की प्रक्रिया चल रही है। वार्ड नंबर एक, दो और तीन के निवासियों का कहना है कि यह जमीन उनके क्षेत्र से जुड़ी है। ग्रामीणों का तर्क है कि बिना जनभागीदारी और उनकी राय जाने प्रशासन कोई भी अंतिम फैसला न ले।
वार्ड निवासियों के अनुसार प्रस्तावित जमीन तीनों वार्डों की साझा संपत्ति है। ग्रामीणों ने मांग की है कि वन अधिकार कानून 2006 के तहत बैठक बुलाई जाए। इसके साथ ही वैधानिक ग्राम सभा की पहचान कर वन अधिकार समिति का चुनाव कराया जाए ताकि जमीन से जुड़े फैसले में स्थानीय लोगों की पूरी भागीदारी तय हो।
ग्रामीणों ने समिति गठन की पिछली और मौजूदा कार्यवाहियों के पूरे रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग उठाई है। इस संबंध में ग्रामीणों ने ज्वालामुखी के एसडीएम और कांगड़ा के जिला मजिस्ट्रेट को भी सूचना भेजी है। लोग पूरी प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता चाहते हैं ताकि किसी भी पात्र निवासी के अधिकारों की अनदेखी न हो सके।
पंचायत भवन में मांग पत्र की रिसीविंग पर हंगामा
विवाद तब गहराया जब ग्रामीण 14 अक्टूबर 2026 को मांग पत्र लेकर पंचायत भवन पहुंचे। उस समय प्रधान, उपप्रधान और सचिव मौके पर मौजूद थे। ग्रामीणों ने पत्र की रिसीविंग मांगी, लेकिन महिला प्रधान ने तुरंत पावती देने से मना कर दिया और दो दिन का समय मांगा। इससे नाराज लोगों ने बीडीओ का दरवाजा खटखटाया।

बीडीओ को शिकायत सौंपने वालों में पंजाब सिंह, अशोक कुमार, प्रकाश चंद, विजय वर्मा और अनिल कुमार शामिल हैं। ग्रामीणों ने आग्रह किया कि उनका मांग पत्र बीडीओ कार्यालय के माध्यम से पंचायत को भेजा जाए। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत प्रतिनिधियों का यह रवैया लोकतांत्रिक व्यवस्था और नियमों के बिल्कुल खिलाफ है।
स्थानीय ग्रामीणों और पूर्व प्रधान ने उठाए सवाल
स्थानीय अधिवक्ता रोहित राणा ने कहा कि वन अधिकार समिति के गठन संबंधी पत्र लेने से मना करना संदेह पैदा करता है। उन्होंने इसकी कड़ी निंदा करते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। पूर्व प्रधान रामकृष्ण ने भी कहा कि पत्र न लेना गंभीर लापरवाही है और इस रवैये की जांच होनी चाहिए।

प्रधान मीना कुमारी ने आरोपों को बताया राजनीति
सलिहार पंचायत की प्रधान मीना कुमारी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे छवि खराब करने की साजिश बताया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग तुरंत जवाब मांग रहे थे, जबकि विचार के लिए दो दिन का समय मांगा गया था। उन्होंने कहा कि बिना बताए हस्ताक्षर करवाने की शिकायतें भी मिली हैं, इसलिए जांच जरूरी है।
प्रधान ने आगे कहा कि पिछली ग्राम सभा में भी कुछ लोगों ने हंगामा कर दूसरों को बोलने नहीं दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग पंचायत को राजनीति का अखाड़ा बनाना चाहते हैं। पंचायत प्रशासन बिना किसी भेदभाव के सभी वार्डों के विकास के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
