New Delhi News: दिवाली 2027 तक सोने की कीमतों में 20 से 40 प्रतिशत तक की तेजी आने का अनुमान जताया गया है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 10 ग्राम सोने का भाव 1.75 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। केंद्रीय बैंकों द्वारा भारी खरीदारी और ब्याज दरों में संभावित कटौती को इस तेजी का मुख्य कारण माना जा रहा है।
भारतीय परिवारों में दिवाली पर सोना खरीदना परंपरा के साथ-साथ सुरक्षित निवेश का बड़ा माध्यम माना जाता है। मौजूदा समय में सोने की कीमतें पहले से ही रिकॉर्ड स्तर पर हैं, लेकिन बाजार जानकारों का कहना है कि यह तेजी आगे भी जारी रह सकती है। यदि विशेषज्ञों के ताजा अनुमान सही साबित होते हैं, तो अगले एक वर्ष के दौरान 10 ग्राम सोने का भाव बढ़कर 1.75 लाख रुपये के आसपास पहुंच सकता है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुमान और संभावित दरें
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के सचिव सुरेंद्र मेहता के अनुसार, लंबी अवधि यानी अगले एक वर्ष में सोने की कीमतों में 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव का सटीक आकलन कठिन होता है, लेकिन मध्यम से लंबी अवधि में तेजी का रुख बना हुआ है।
वहीं, ऑगमॉन्ट की चीफ रिसर्च ऑफिसर रेनिशा चेनानी का मानना है कि दिवाली 2027 तक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने का भाव 10 ग्राम के लिए करीब 1.75 लाख रुपये तक जा सकता है। वर्तमान में यह स्तर लगभग 1.45 लाख रुपये के आसपास है, जिसके आधार पर करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसके लगभग 4,950 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।
सोने में तेजी के प्रमुख वैश्विक कारण
सोने की कीमतों को मजबूती देने में कई वैश्विक कारक सक्रिय हैं। पहला, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की लगातार की जा रही भारी खरीदारी है। चालू वर्ष की तीसरी तिमाही में विभिन्न केंद्रीय बैंकों ने कुल 321 टन सोना खरीदा, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 42 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही गोल्ड ईटीएफ (ETF) में कुल होल्डिंग बढ़कर 4,256 टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
दूसरा मुख्य कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति से जुड़ा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि कच्चे तेल की कम कीमतों से महंगाई नियंत्रित रहने पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती का निर्णय ले सकता है। ब्याज दरें घटने पर डॉलर और बॉन्ड से मिलने वाला लाभ घटता है, जिससे निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर रुख करते हैं।
चांदी में आपूर्ति की कमी से उछाल की संभावना
सोने के साथ-साथ चांदी में भी तेजी का रुझान बने रहने का अनुमान है। बाजार में चांदी की मांग उसकी आपूर्ति से अधिक चल रही है, जिसके चलते लगातार छठे वर्ष भी इसका बाजार घाटे (सप्लाई डेफिसिट) में रहने की संभावना है। हालांकि, विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि अमेरिका में यदि महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहती है या फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ाता है, तो सोने की गति प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा घरेलू स्तर पर रुपये की मजबूती भी कीमतों की बढ़त को सीमित कर सकती है।
पिछले 10 वर्षों में 4.77 गुना बढ़ा भाव
ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, सोने ने पिछले एक दशक में निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है। साल 2016 में दिवाली के समय दिल्ली में 10 ग्राम सोने का भाव करीब 30,590 रुपये था, जो 5 नवंबर 2026 तक बढ़कर लगभग 1,45,915 रुपये पर पहुंच गया। इस अवधि में सोने की कीमतों में करीब 4.77 गुना वृद्धि दर्ज हुई। वर्ष 2024 में इसमें 30.6 प्रतिशत और 2025 में 61.5 प्रतिशत का उछाल आया था, हालांकि 2021 में इसमें 5.6 प्रतिशत की मामूली गिरावट भी देखी गई थी।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि निवेशक अपने कुल वित्तीय पोर्टफोलियो का 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा सोने में आवंटित कर सकते हैं। इसके लिए एकमुश्त निवेश के बजाय गोल्ड ईटीएफ या गोल्ड म्यूचुअल फंड के माध्यम से किस्तों में निवेश करना अधिक सुरक्षित रणनीति मानी जाती है। वहीं, पारिवारिक उपयोग के लिए हॉलमार्क प्रमाणित आभूषणों की ही खरीदारी करने की सलाह दी गई है।